मनीषा शर्मा। आज के समय में बड़ी संख्या में युवा और प्रोफेशनल्स अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे हैं। आइडिया नया हो, टीम मजबूत हो और प्रोडक्ट बेहतरीन हो—इन सबके बावजूद अगर ब्रांडिंग कमजोर है, तो बिजनेस का लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि शार्क टैंक इंडिया जैसे रिएलिटी शो में भी निवेशक बार-बार ब्रांडिंग की अहमियत पर जोर देते नजर आते हैं। ब्रांडिंग सिर्फ लोगो या नाम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह तय करती है कि लोग आपके बिजनेस को कैसे देखते हैं और कितना भरोसा करते हैं।
1. ब्रांडिंग को हल्के में लेना
कई नए स्टार्टअप फाउंडर यह मान लेते हैं कि एक अच्छा नाम, सुंदर लोगो और आकर्षक टैगलाइन ही पूरी ब्रांडिंग है। जबकि हकीकत यह है कि ब्रांडिंग लोगों की सोच और अनुभव से जुड़ी होती है। अगर आपका ब्रांड आपके बिजनेस की वैल्यू और विजन को नहीं दर्शाता, तो लोग आपसे जल्दी जुड़ नहीं पाएंगे। ब्रांडिंग करते समय यह समझना जरूरी है कि आपका ब्रांड लोगों के दिमाग में कैसी छवि बनाना चाहता है।
2. मार्केट रिसर्च को नजरअंदाज करना
मार्केट रिसर्च किसी भी स्टार्टअप की नींव होती है। इसके जरिए आप अपने टारगेट ऑडिएंस की जरूरत, पसंद और समस्याओं को समझ सकते हैं। कई फाउंडर इसे पैसे या समय की बर्बादी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि वे ऐसा प्रोडक्ट या ब्रांड मैसेज पेश कर देते हैं, जो लोगों को पसंद ही नहीं आता। बिना पब्लिक का मूड समझे ब्रांडिंग करना बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।
3. बिना ट्रेडमार्क वाला ब्रांड नेम चुनना
शुरुआती जोश में कई स्टार्टअप ऐसे ब्रांड नेम चुन लेते हैं, जिसका ट्रेडमार्क पहले से मौजूद होता है या जिसे रजिस्टर ही नहीं किया जा सकता। शुरुआत में यह समस्या नहीं लगती, लेकिन जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ता है, कानूनी अड़चनें सामने आने लगती हैं। कई बार फाउंडर को मजबूरन ब्रांड नेम बदलना पड़ता है या ट्रेडमार्क खरीदने के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।
4. पहले से चल रहे ब्रांड की कॉपी करना
कुछ स्टार्टअप तेजी से सफलता पाने के चक्कर में पहले से सफल ब्रांड की नकल करने लगते हैं। शुरुआत में थोड़ी पहचान मिल भी जाती है, लेकिन लंबे समय में यह रणनीति फेल हो जाती है। कॉपी किए गए ब्रांड की अपनी कोई अलग पहचान नहीं बन पाती, जिससे ग्रोथ रुक जाती है। बिजनेस में टिके रहने के लिए खुद का यूनिक आइडिया और इनोवेशन जरूरी है।
5. बार-बार ब्रांडिंग बदलना
लोगो, रंग, फॉन्ट और ब्रांड आइडेंटिटी को बार-बार बदलना ऑडिएंस को कन्फ्यूज कर सकता है। कई स्टार्टअप कुछ महीनों में ही अपनी पूरी ब्रांडिंग बदल देते हैं। इससे ब्रांड की पहचान कमजोर होती है। शुरुआत में सोच-समझकर ब्रांडिंग करना और जरूरत पड़ने पर सीमित बदलाव करना ही बेहतर रणनीति मानी जाती है।
6. स्टोरीटेलिंग की ताकत को नजरअंदाज करना
हर ब्रांड की एक कहानी होती है—संघर्ष की, प्रेरणा की या बदलाव की। अगर यह कहानी लोगों तक नहीं पहुंचती, तो ब्रांड से इमोशनल कनेक्शन नहीं बन पाता। मजबूत स्टोरीटेलिंग आपके ब्रांड को भीड़ से अलग पहचान देती है। सोशल मीडिया, वेबसाइट और इंटरव्यू के जरिए अपनी ब्रांड स्टोरी को लगातार साझा करना जरूरी है।
7. ब्रांड मैसेज को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाना
ब्रांड मैसेज जितना आसान और स्पष्ट होगा, उतना ही लोगों तक जल्दी पहुंचेगा। कई फाउंडर भारी-भरकम शब्दों और जटिल भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मैसेज समझ में ही नहीं आता। अगर लोग आपके ब्रांड को समझ ही नहीं पाएंगे, तो वे उससे जुड़ेंगे कैसे।
8. हर किसी को खुश करने की कोशिश
सभी को खुश करने की कोशिश में कई स्टार्टअप अपनी ब्रांड पहचान खो बैठते हैं। जब ब्रांड हर कैटेगरी के लिए खुद को ढालने लगता है, तो उसकी पर्सनैलिटी कमजोर हो जाती है। बेहतर यही है कि एक साफ टारगेट ऑडिएंस तय करें और उसी के हिसाब से ब्रांडिंग करें।
9. ब्रांड वॉइस को नजरअंदाज करना
ब्रांड वॉइस आपके बिजनेस की पर्सनैलिटी को दर्शाती है। आपकी भाषा, टोन और कम्युनिकेशन स्टाइल यह तय करती है कि ऑडिएंस आपको कैसे महसूस करती है। अगर ब्रांड वॉइस साफ नहीं होगी, तो लोगों के साथ मजबूत कनेक्शन बनाना मुश्किल हो जाएगा।
10. कस्टमर फीडबैक को अनदेखा करना
ग्राहकों का फीडबैक किसी भी ब्रांड के लिए सबसे कीमती होता है। अगर ग्राहक किसी बदलाव की मांग कर रहे हैं और आप उसे नजरअंदाज कर देते हैं, तो धीरे-धीरे वे आपसे दूर हो सकते हैं। ब्रांडिंग और प्रोडक्ट दोनों को समय-समय पर कस्टमर फीडबैक के अनुसार अपडेट करना जरूरी है।
मजबूत ब्रांडिंग ही स्टार्टअप की असली ताकत
स्टार्टअप शुरू करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही तरीके से पेश करना। मजबूत ब्रांडिंग सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह आपके बिजनेस की पहचान बनाती है। जो स्टार्टअप शुरुआत से ही टारगेट ऑडिएंस, ब्रांड वॉइस और स्टोरी पर ध्यान देते हैं, वही लंबे समय तक बाजार में टिक पाते हैं। ब्रांडिंग में की गई छोटी-सी लापरवाही भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।


