मनीषा शर्मा। सीकर में सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया जब बीजेपी नेता डॉ. बीएल रणवा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। हाल ही में डोटासरा द्वारा की गई टिप्पणी पर डॉ. रणवा ने कड़ा पलटवार करते हुए इसे न केवल व्यक्तिगत अपमान बताया, बल्कि अपने मूल अधिकारों का हनन भी करार दिया। इस बयानबाजी के बाद सीकर की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसके दूरगामी राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं।
डॉ. बीएल रणवा बोले- मेरे मूल अधिकारों का हुआ हनन
बीजेपी नेता डॉ. बीएल रणवा ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सार्वजनिक मंच से मेरे जैसे किसान के बेटे पर टिप्पणी कर मेरे मूल अधिकारों का उल्लंघन किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब डोटासरा यह भी तय करेंगे कि मैं किस रंग की जैकेट पहनूं। डॉ. रणवा ने कहा कि केसरिया रंग का अपमान करने का अधिकार डोटासरा को किसने दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवा और केसरिया मूल रूप से एक ही रंग हैं, जो भारतीय संस्कृति में त्याग, तपस्या, साधु-संतों, आध्यात्मिकता और वीरता का प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस रंग का अपमान न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि यह साधु-संतों, देवी-देवताओं और देश की सांस्कृतिक परंपराओं का भी अपमान है।
भगवा रंग को लेकर बीजेपी नेताओं का तीखा विरोध
डॉ. रणवा के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भगवा और केसरिया रंग का संबंध सीधे तौर पर भारतीय परंपरा, आस्था और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सार्वजनिक मंच से इस रंग पर टिप्पणी करना साधु-संतों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का भी अपमान बताया है।
डोटासरा ने कसा था तंज, वहीं से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की एक टिप्पणी से शुरू हुआ। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान डोटासरा ने सीकर के एक डॉक्टर पर तंज कसते हुए कहा था कि जिले में एक डॉक्टर है, जिसका अस्पताल ठीक से नहीं चलता और वह सरकारी योजनाओं के सहारे ही चल रहा है। इसी दौरान उन्होंने भगवा जैकेट पहनने को लेकर भी टिप्पणी की थी। डोटासरा के इस बयान को बीजेपी नेता डॉ. बीएल रणवा से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी और डोटासरा के बयान को अपमानजनक बताया।
बीजेपी नेता बोले- सरकारी योजनाओं से जनता को लाभ मिलना चाहिए
डोटासरा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रणवा ने कहा कि वे किसी निजी अस्पताल के मालिक नहीं, बल्कि एक अस्पताल के ट्रस्टी हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह अस्पताल सरकारी योजनाओं के तहत आमजन की सेवा कर रहा है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यह नहीं चाहते कि सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद जनता तक पहुंचे। डॉ. रणवा ने कहा कि अगर सरकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों को बेहतर इलाज मिल रहा है, तो यह सरकार और समाज दोनों के लिए सकारात्मक बात है, न कि आलोचना का विषय।
सियासी बयानबाजी के और तेज होने के आसार
डॉ. बीएल रणवा के इस बयान के बाद सीकर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में सियासी बयानबाजी के और तेज होने के आसार हैं। बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर टकराव चल रहा है और अब यह नया विवाद राजनीतिक बहस को और धार दे सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भगवा रंग और सरकारी योजनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी से दोनों दलों के समर्थकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो सकती है। ऐसे मामलों में शब्दों की मर्यादा बनाए रखना जरूरी होता है, ताकि विवाद अनावश्यक रूप से न बढ़े।
सीकर की राजनीति में बढ़ा तनाव
सीकर पहले से ही प्रदेश की राजनीति में एक अहम केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां के नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी का असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी के स्थानीय नेता के बीच सीधा टकराव यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में सियासी माहौल और गर्म हो सकता है।


