राजस्थान में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने रविवार को जोधपुर में इस संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अब आरटीई के तहत प्रवेश के लिए वार्ड को इकाई नहीं माना जाएगा, बल्कि पूरे जिले को इकाई बनाया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने यह घोषणा जोधपुर में अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान एक निजी होटल में आयोजित स्कूल शिक्षा परिवार के नव वर्ष मिलन समारोह के दौरान की। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालक और शिक्षा से जुड़े लोग मौजूद थे। मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और अभिभावकों के अनुकूल बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है।
अब वार्ड की बाध्यता खत्म
अब तक आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया में यह व्यवस्था थी कि किसी निजी स्कूल में केवल उसी वार्ड के निवासी अभिभावक अपने बच्चों के लिए आवेदन कर सकते थे, जिसमें वह स्कूल स्थित है। यदि कोई अभिभावक अपने वार्ड से बाहर स्थित किसी बेहतर या पसंदीदा स्कूल में प्रवेश चाहता था, तो उसे वरीयता नहीं मिल पाती थी। इस कारण कई योग्य और जरूरतमंद बच्चे अच्छे स्कूलों में दाखिले से वंचित रह जाते थे।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब पूरे जिले को एक इकाई मानकर आरटीई के तहत प्रवेश दिया जाएगा। यानी जिस जिले में बच्चा निवास करता है, वह उस जिले के किसी भी निजी स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेगा। इससे अभिभावकों को स्कूल चुनने की आजादी मिलेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल का अवसर प्राप्त होगा।
अभिभावकों और विद्यार्थियों को होगा सीधा फायदा
मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि यह फैसला खास तौर पर उन परिवारों के हित में लिया गया है, जो अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन नियमों की जटिलता के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे। अब जिले के भीतर कहीं भी आवेदन की सुविधा मिलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्कूलों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
तबादलों को लेकर भी दिया बयान
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने तबादलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और लेक्चरर स्तर पर करीब 13 से 14 हजार तबादले किए गए हैं, लेकिन कहीं से भी किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासन में तबादलों को लेकर पारदर्शिता रखी गई है।
मंत्री ने कांग्रेस शासन पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय तबादलों में भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन की शिकायतें शिक्षक खुलेआम करते थे, लेकिन वर्तमान सरकार में ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
शिक्षा सुधार की दिशा में अहम कदम
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में किया गया यह बदलाव राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक अहम सुधार के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं और हजारों बच्चों को बेहतर स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिल सकेगा।


