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जोधपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने BJP नेता के सामने पकड़े कान, वीडियो पर मचा सियासी बवाल

जोधपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने BJP नेता के सामने पकड़े कान, वीडियो पर मचा सियासी बवाल

मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब जोधपुर से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इस वीडियो में शिक्षा मंत्री BJP के पूर्व जिला अध्यक्ष मनोहर पालीवाल के सामने कान पकड़कर माफी मांगते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो रविवार सुबह करीब 9 से 10 बजे के बीच जोधपुर सर्किट हाउस का है, जब मंत्री जोधपुर दौरे पर थे। वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

ब्लू हेवन स्कूल की मान्यता को लेकर हुई मुलाकात

जानकारी के अनुसार, जोधपुर जिला प्रभारी शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से मिलने पूर्व BJP जिला अध्यक्ष मनोहर पालीवाल रविवार सुबह सर्किट हाउस पहुंचे थे। पालीवाल ब्लू हेवन पब्लिक स्कूल की मान्यता बहाल करने की सिफारिश लेकर मंत्री से मिलने आए थे। यह स्कूल अतिक्रमण की जमीन पर बना हुआ था, जिसकी मान्यता जांच के बाद रद्द कर दी गई थी। मुलाकात के दौरान मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्कूल की मान्यता बहाल करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और नियमों के खिलाफ कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसी बातचीत के दौरान मंत्री ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और कान भी पकड़े, जिसका वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और बाद में यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

शिक्षा मंत्री का स्पष्टीकरण, निजी बातचीत बताया

वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूरे मामले पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मनोहर पालीवाल उनके पुराने मित्र हैं और उनके बीच बातचीत निजी थी। मंत्री के अनुसार, वे आपस में सामान्य बातचीत कर रहे थे और उसी दौरान मजाकिया अंदाज में उन्होंने माफी मांग ली। मदन दिलावर ने कहा कि किसी निजी बातचीत को इस तरह रिकॉर्ड कर वायरल करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी दबाव में आकर कोई निर्णय नहीं लिया और न ही किसी नियम को तोड़ने की बात की गई।

मनोहर पालीवाल ने भी वीडियो को बताया गलत तरीके से पेश किया गया

पूर्व BJP जिला अध्यक्ष मनोहर पालीवाल ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक निजी मुलाकात थी, जिसे बेवजह सार्वजनिक कर दिया गया। पालीवाल के अनुसार, वे किसी विशेष मामले को लेकर मंत्री से चर्चा करने आए थे, लेकिन न तो स्कूल की मान्यता बहाल करने का दबाव बनाया गया और न ही किसी तरह की औपचारिक माफी की मांग की गई। उन्होंने कहा कि मंत्री पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और बातचीत के दौरान मजाक में उन्होंने कान पकड़ लिए, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पालीवाल ने इसे बेवजह तूल देने की कोशिश बताया।

अतिक्रमण की जमीन पर बने स्कूलों पर सख्त रुख

इस पूरे विवाद के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अतिक्रमण की जमीन पर बने स्कूलों को लेकर सरकार का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ब्लू हेवन पब्लिक स्कूल की मान्यता इसलिए रद्द की गई थी, क्योंकि वह अतिक्रमण की जमीन पर बना था और मान्यता लेते समय गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए थे। मंत्री ने साफ कहा कि जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद ही मान्यता रद्द की गई और भविष्य में भी यदि कोई स्कूल अतिक्रमण की जमीन पर पाया गया, तो उसकी मान्यता बिना किसी दबाव के रद्द की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि शिक्षा विभाग नियमों से समझौता नहीं करेगा।

मिड-डे मील को लेकर कांग्रेस पर निशाना

जोधपुर दौरे के दौरान शिक्षा मंत्री ने मिड-डे मील योजना को लेकर कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मिड-डे मील योजना में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखने को मिली थी। उनके अनुसार, ऊपर से लेकर नीचे तक सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार हुआ, जिसकी अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जांच कर रही है। मदन दिलावर ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ACB चालान पेश करेगी और इसके बाद अदालत नियमानुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है।

राजनीति में शिष्टाचार या सियासी संदेश?

शिक्षा मंत्री के कान पकड़कर माफी मांगने के वीडियो को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से इसे देख रहे हैं। कुछ इसे शिष्टाचार और व्यक्तिगत संबंधों का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ इसे सियासी संदेश और दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि मंत्री और पूर्व जिलाध्यक्ष दोनों ने इसे निजी बातचीत और मजाक करार दिया है।

वीडियो वायरल होने से बढ़ी सियासी हलचल

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे अनावश्यक विवाद बता रहा है। फिलहाल शिक्षा मंत्री ने नियमों के पालन और अतिक्रमण पर बने स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के अपने रुख को दोहराया है।

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