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जालोर में 38 पुलिस कॉन्स्टेबल पर FIR, डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेज से मिली थी नौकरी

जालोर में 38 पुलिस कॉन्स्टेबल पर FIR, डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेज से मिली थी नौकरी

मनीषा शर्मा। राजस्थान के जालोर जिले में पुलिस भर्ती से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने डमी कैंडिडेट और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 38 पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई प्रमोशन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में सामने आए सिग्नेचर मिसमैच के बाद की गई। एसओजी ने शनिवार को दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

यह मामला सामने आने के बाद न केवल जालोर बल्कि पूरे राजस्थान में पुलिस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल शुरुआत हो सकती है और आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं।

प्रमोशन प्रक्रिया में हुआ फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

जानकारी के अनुसार, ये पुलिस कॉन्स्टेबल पदोन्नति की प्रक्रिया से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनके भर्ती समय के दस्तावेजों और वर्तमान रिकॉर्ड की तुलना की गई। जांच में कई मामलों में भर्ती के समय किए गए हस्ताक्षर और वर्तमान हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया। इस सिग्नेचर मिसमैच ने अधिकारियों को संदेह के घेरे में ला दिया, जिसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच में यह संकेत मिले कि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा के समय डमी कैंडिडेट बैठाए थे, जबकि कुछ ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी।

पिछले पांच वर्षों की भर्तियों की जांच के आदेश

इस पूरे मामले की नींव जुलाई 2024 में पड़ी, जब राजस्थान पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड ने जालोर के जिला पुलिस अधीक्षक को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इस पत्र में पिछले पांच वर्षों में हुई पुलिस भर्तियों की जांच के निर्देश दिए गए थे। विशेष रूप से उन मामलों की जांच करने को कहा गया था, जिनमें फर्जी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज या डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने की आशंका थी। पत्र में यह भी निर्देश दिए गए थे कि जांच के बाद संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर एसओजी को भेजी जाए, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।

एसपी जालोर ने गठित की जांच समिति

राजस्थान पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड के निर्देशों के बाद जालोर के पुलिस अधीक्षक की ओर से एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया। इस समिति ने पिछले पांच वर्षों की भर्तियों के रिकॉर्ड, आवेदन पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षरों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि कम से कम 30 पुलिस कॉन्स्टेबल ऐसे हैं, जिन्होंने जालसाजी के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर संदिग्ध पुलिसकर्मियों की सूची एसओजी को भेजी, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

2018 भर्ती के 26 कॉन्स्टेबल के सिग्नेचर मिसमैच

जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 की पुलिस भर्ती में चयनित 26 पुलिस कॉन्स्टेबल के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। भर्ती के समय किए गए हस्ताक्षर और वर्तमान रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षरों में स्पष्ट अंतर पाया गया। इन 26 पुलिस कॉन्स्टेबल में जैसाराम, दिनेश कुमार, अर्जुन कुमार, घेवरचंद, यशवंत सिंह, दिनेश कुमार, बदराम, गोपीलाल, हरीश कुमार, नरपत सिंह, दिनेश कुमार, नपाराम, सुरेशकुमार, चतराराम, सुरेश कुमार, भाणाराम, रमेश कुमार, सुशीला कुमारी, शांतिलाल, देवी सिंह, जितेन्द्र कुमार, राकेश कुमार, मुकेश कुमार, डूंगराराम, रेवंतीरमन और खुशीराम शामिल हैं। इन सभी के दस्तावेजों में हस्ताक्षरों के अंतर को गंभीर मानते हुए एसओजी ने इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

11 कॉन्स्टेबल पर डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेज का आरोप

इसके अलावा एसपी जालोर द्वारा गठित जांच समिति ने डमी कैंडिडेट और फर्जी दस्तावेजों के मामलों की भी अलग से जांच की। आवेदन पत्र, फोटो और हस्ताक्षरों की गहन पड़ताल में 11 पुलिस कॉन्स्टेबल के सिग्नेचर और अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। इनमें पुलिस कॉन्स्टेबल प्रदीप कुमार, अनिल कुमार, संजय कुमार, धनवत्नी, प्रियंका, ललिता, निरमा, सपना शर्मा, संदीप कुमार, पंकज कुमार और सोहनलाल शामिल हैं। जांच में संकेत मिले कि इन अभ्यर्थियों ने या तो परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाया था या फिर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर नौकरी हासिल की थी।

एसओजी ने दर्ज की दो अलग-अलग FIR

जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद जालोर जिला एसपी की ओर से पूरी जानकारी एसओजी को भेजी गई। इसके आधार पर एसओजी ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर सिग्नेचर मिसमैच के मामलों को लेकर और दूसरी एफआईआर डमी कैंडिडेट व फर्जी दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर दर्ज की गई है। एसओजी अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

पुलिस भर्ती प्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने राजस्थान की पुलिस भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विभाग पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उसी में इस तरह की जालसाजी सामने आना बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनकी नौकरी भी जा सकती है।

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