दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बार फिर सख्त कदम उठाया है। आयोग ने पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाली एनसीआर की 16 औद्योगिक इकाइयों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया है। इनमें हरियाणा की 14, उत्तर प्रदेश की एक और राजस्थान की एक औद्योगिक इकाई शामिल है। इस कार्रवाई को प्रदूषण पर लगाम लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
राजस्थान के औद्योगिक इलाकों में मचा हड़कंप
CAQM की इस कार्रवाई का असर राजस्थान तक साफ नजर आ रहा है। खासतौर पर दिल्ली से सटे अलवर और भिवाड़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। इन इलाकों में लंबे समय से प्रदूषण एक गंभीर समस्या बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार राजस्थान की जिस फैक्ट्री को बंद करने का आदेश दिया गया है, वहां लगातार पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जा रही थी। बार-बार चेतावनी के बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन ने जरूरी सुधार नहीं किए, जिसके बाद आयोग को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
जांच में सामने आईं गंभीर खामियां
CAQM की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। कई औद्योगिक इकाइयां बिना जरूरी अनुमति यानी कंसेंट टू एस्टैब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) के ही संचालित हो रही थीं। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण या तो लगाए ही नहीं गए थे या जानबूझकर बंद रखे गए थे। इससे वातावरण में जहरीले कणों की मात्रा तेजी से बढ़ रही थी, जो सीधे लोगों की सेहत पर असर डालती है।
प्रतिबंधित ईंधन और डीजल जनरेटर बना बड़ी वजह
जांच में यह भी सामने आया कि कई इकाइयों में प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस तरह का ईंधन हवा में हानिकारक गैसों और सूक्ष्म कणों को कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा डीजल जनरेटरों के उपयोग में भी नियमों की जमकर अनदेखी की गई। ये सभी कारण मिलकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में प्रदूषण की स्थिति को और गंभीर बना रहे थे।
GRAP नियमों की अनदेखी, अब बिना सुधार नहीं खुलेगी फैक्ट्री
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के नियमों को भी इन फैक्ट्रियों ने नजरअंदाज किया। नियमों के तहत प्रदूषण बढ़ने पर कुछ औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन जारी रखा गया। CAQM ने साफ कर दिया है कि जब तक ये औद्योगिक इकाइयां सभी पर्यावरणीय मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, तब तक इन्हें दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोग का मानना है कि हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।


