शोभना शर्मा। ग्रामीण क्षेत्रों के करोड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के नाम और स्वरूप में बदलाव को लेकर राजस्थान में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की है कि 10 जनवरी से प्रदेशभर में 45 दिन तक लगातार आंदोलन चलाया जाएगा। इस आंदोलन को “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम दिया गया है, जिसके तहत प्रदेश स्तर से लेकर जिला, मंडल, वार्ड और बूथ स्तर तक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए काम का अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस योजना में बदलाव कर राइट टू वर्क यानी काम के अधिकार को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार नए प्रावधानों में 125 दिन रोजगार देने की बात कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। बीते दो वर्षों में भाजपा सरकार ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का रोजगार तक नहीं दे पाई है, ऐसे में 125 दिन रोजगार देने का दावा पूरी तरह खोखला है।
पीसीसी चीफ ने कहा कि मौजूदा हालात में ग्रामीण मजदूरों को मुश्किल से 30 से 35 दिन का काम ही मिल पा रहा है। इससे गांवों में बेरोजगारी बढ़ रही है और गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार योजनाओं के नाम बदलकर और नियमों में फेरबदल कर मनरेगा को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस ने विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है। प्रदेश प्रवक्ता आरसी चौधरी ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 10 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनरेगा के नए कानून और बदलावों से होने वाले नुकसान को आम जनता के सामने रखा जाएगा। इसके अगले दिन 11 जनवरी को प्रदेशभर में कांग्रेस के सभी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपवास रखकर विरोध दर्ज कराएंगे।
12 जनवरी से आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर जागरूक करेंगे। इस दौरान लोगों को बताया जाएगा कि किस तरह नए प्रावधानों से उनके रोजगार के अधिकार पर असर पड़ सकता है। 45 दिन तक चलने वाले इस अभियान के समापन पर एक राज्य स्तरीय जनसभा का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे।
कांग्रेस ने इस आंदोलन में संगठन के हर स्तर को जोड़ने की रणनीति बनाई है। मौजूदा सांसदों और विधायकों के साथ-साथ पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। जिला, मंडल, वार्ड और बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को इस आंदोलन से जोड़कर इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मनरेगा को बचाना केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस मनरेगा को कमजोर होने से बचाने में सफल होती है, तो इससे बड़ा पुण्य का काम और कुछ नहीं हो सकता। उनका कहना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे कमजोर करने का सीधा नुकसान गरीब, मजदूर और किसान परिवारों को होगा।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा के भुगतान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा का कहना है कि सरकार ने काम तो करा लिया, लेकिन मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा। वर्तमान में मनरेगा के तहत लगभग 5000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, जिसे जानबूझकर रोका गया है। इससे ग्रामीण मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है।


