latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

केरल चुनाव में सचिन पायलट को बड़ी जिम्मेदारी, कांग्रेस के बदले सियासी संकेत

केरल चुनाव में सचिन पायलट को बड़ी जिम्मेदारी, कांग्रेस के बदले सियासी संकेत

शोभना शर्मा।  कांग्रेस पार्टी ने आने वाले केरल विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा सियासी फैसला लेते हुए सचिन पायलट को सीनियर ऑब्जर्बर नियुक्त किया है। यह केवल एक संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य और रणनीति से जुड़ा अहम संकेत माना जा रहा है। केरल में कांग्रेस पिछले दस वर्षों से सत्ता से बाहर है और इस बार वह पूरे दमखम के साथ सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी ने एक युवा, ऊर्जावान और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेता को यह अहम जिम्मेदारी सौंपकर साफ कर दिया है कि वह चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।

सचिन पायलट को यह जिम्मेदारी कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री के साथ मिलकर निभानी होगी। दोनों नेताओं को मिलकर उम्मीदवार चयन से लेकर जमीनी रणनीति, संगठन की मजबूती और चुनावी तालमेल तक हर स्तर पर काम करना है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि सचिन पायलट की कार्यशैली, संवाद क्षमता और युवा मतदाताओं से जुड़ने की ताकत केरल जैसे राज्य में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

इस नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट का कद बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। खास बात यह है कि 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राजस्थान से केवल सचिन पायलट को ही सीनियर पर्यवेक्षक के रूप में चुना गया है। इसे राजनीतिक हलकों में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब राजस्थान में उम्रदराज नेतृत्व की तुलना में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के मूड में है। इसी कारण कई विश्लेषक इसे अशोक गहलोत की बजाय सचिन पायलट को तरजीह देने के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

पिछले अनुभवों को देखें तो यह बदलाव और भी अहम हो जाता है। वर्ष 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत को कांग्रेस का सीनियर चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया था। उस चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी के भीतर यह चर्चा रही कि बिहार में महागठबंधन की सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर जो फैसले लिए गए, वे कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हुए। पटना में हुई साझा प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री चेहरा और मुकेश सहनी को उप मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया था। बाद में इन घोषणाओं को कांग्रेस की कमजोर स्थिति और हार के बड़े कारणों में गिना गया।

ऐसे में केरल चुनाव के लिए सचिन पायलट को आगे करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब अपने फैसलों में नए प्रयोग और नई सोच को प्राथमिकता दे रही है। यह भी संकेत है कि पार्टी पिछले चुनावी अनुभवों से सबक लेना चाहती है।

सचिन पायलट और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबे समय से चली आ रही दूरी अब धीरे-धीरे खत्म होती दिखाई दे रही है। 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पार्टी और सचिन के रिश्तों में आई तल्खी अब बीते कल की बात होती जा रही है। दोनों तरफ से पहल होने के बाद रिश्तों में सुधार आया है और अब हालात पहले से बेहतर माने जा रहे हैं। दौसा और आसपास के इलाकों में भी इसे उम्मीदों की नई लहर के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले वर्ष सचिन पायलट ने अशोक गहलोत से मुलाकात कर आपसी रिश्तों को सुधारने की कोशिश की थी। माना जाता है कि गहलोत से टकराव के कारण सचिन को राजनीतिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें डिप्टी सीएम का पद छिनना भी शामिल है। अब वे नई जिम्मेदारियों के जरिए खुद को फिर से साबित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि सचिन पायलट कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं। प्रियंका गांधी वर्तमान में केरल के वायनाड से सांसद हैं। ऐसे में केरल चुनाव में सचिन पायलट की भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रियंका गांधी की राजनीतिक साख को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी अप्रत्यक्ष रूप से उनके कंधों पर होगी। कुल मिलाकर, केरल चुनाव कांग्रेस के लिए ही नहीं, बल्कि सचिन पायलट के राजनीतिक भविष्य के लिए भी बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading