राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और जनप्रतिनिधियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में आरजीएचएस के अंतर्गत अस्पतालों की संख्या बढ़ाकर 1,720 से अधिक कर दी है। इससे लाखों लाभार्थियों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है।
राज्य के बाहर भी मिलेगा कैशलेस इलाज
आरजीएचएस योजना के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब राजस्थान से बाहर स्थित अस्पतालों को भी योजना में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस चरण में राज्य के बाहर स्थित 40 अस्पतालों को आरजीएचएस नेटवर्क में सूचीबद्ध किया गया है। इससे उन मरीजों को राहत मिलेगी जिन्हें गंभीर बीमारियों, जटिल सर्जरी या विशेष उपचार के लिए दिल्ली, गुजरात या अन्य राज्यों के बड़े चिकित्सा संस्थानों में इलाज कराना पड़ता है। अब ऐसे लाभार्थी भी कैशलेस सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
किन वर्गों को मिलता है RGHS योजना का लाभ
आरजीएचएस योजना का लाभ राज्य के मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, राज्य सरकार के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी तथा राज्य की स्वायत्त संस्थाओं में कार्यरत कार्मिक उठा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी सीजीएचएस की पैकेज दरों पर कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। लाभार्थियों की श्रेणी के अनुसार चिकित्सा नियम तय किए गए हैं, जिनके तहत इलाज की सुविधा दी जाती है।
लाखों पंजीकृत सदस्य ले रहे लाभ
वर्तमान में आरजीएचएस योजना के अंतर्गत लगभग 37.6 लाख पंजीकृत पारिवारिक सदस्य शामिल हैं। योजना के जरिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट, डे-केयर प्रक्रियाएं, आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट परामर्श, विभिन्न प्रकार की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांचें तथा आवश्यक दवाएं शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को बिना किसी आर्थिक बोझ के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। अप्रैल 2025 से अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले 159 निजी अस्पतालों को आरजीएचएस से निलंबित कर उनके आईडी ब्लॉक किए गए हैं। इसके अलावा पांच अस्पतालों को पूरी तरह से योजना से बाहर कर दिया गया है।
करोड़ों रुपए का जुर्माना वसूला
जांच और सुनवाई के बाद दोषी पाए गए अस्पतालों पर कुल 26.1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 25 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है। फिलहाल 65 निजी अस्पताल निलंबित हैं और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और लाभार्थियों को सही सेवाएं देने के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे।


