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राजस्व गांवों की कृषि भूमि कन्वर्जन पर नई गाइडलाइन: अब नगरीय निकाय करेंगे मंजूरी

राजस्व गांवों की कृषि भूमि कन्वर्जन पर नई गाइडलाइन: अब नगरीय निकाय करेंगे मंजूरी

मनीषा शर्मा। राज्य सरकार ने उन राजस्व गांवों की कृषि भूमि के कन्वर्जन (संपरिवर्तन) को लेकर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है, जिन्हें पिछले साल मार्च में शहरी सीमा में शामिल किया गया था। लंबे समय से यह संशय बना हुआ था कि इन गांवों की एग्रीकल्चर जमीन के कन्वर्जन की प्रक्रिया जिला प्रशासन करेगा या संबंधित नगरीय निकाय। अब तीन विभागों — नगरीय विकास, स्वायत्त शासन और राजस्व विभाग — ने संयुक्त आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

जारी परिपत्र के अनुसार, जिन राजस्व गांवों को 18 मार्च 2025 को शहरी सीमा में शामिल किया गया था, वहां अब कृषि भूमि का कन्वर्जन सीधे संबंधित नगरीय निकाय (नगर पालिका, नगर परिषद, यूआईटी या विकास प्राधिकरण) में ही करवाना होगा। इसका मतलब यह हुआ कि इन क्षेत्रों में प्लॉटिंग, निर्माण और भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़े सभी आवेदन अब शहरी निकायों के दायरे में आएंगे।

पहले से लंबित प्रकरणों पर क्या होगा

नई गाइडलाइन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि 18 मार्च 2025 से पहले जो आवेदन जिला प्रशासन के पास लंबित थे, उनका क्या होगा। आदेश के अनुसार:

यदि किसी आवेदन पर 18 मार्च 2025 से पहले कार्यवाही शुरू हो चुकी थी और मांग राशि आंशिक या पूर्ण रूप से जमा हो चुकी है, तो ऐसे मामलों की प्रक्रिया जिला प्रशासन ही पूरी करेगा। हालांकि इन मामलों में भी आगे का निर्माण और भूमि उपयोग अनुमोदन नगरीय विकास विभाग द्वारा जारी बिल्डिंग बायलॉज और टाउनशिप पॉलिसी के नए नियमों के अनुसार ही होगा।

जहां शुल्क जमा नहीं हुआ, वहां दोबारा आवेदन

दूसरी स्थिति में, यदि आवेदन 18 मार्च 2025 से पहले प्रस्तुत तो हो गया था लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई या मांग राशि जारी नहीं की गई, तो ऐसे आवेदन निरस्त माने जाएंगे। आवेदकों को अब नया आवेदन सीधे संबंधित नगरीय निकाय में करना होगा।

यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि सभी नई फाइलें एक समान शहरी नियमों के तहत निपटाई जा सकें और भविष्य में विवाद या दोहरी कार्यवाही से बचा जा सके।

नियमों के एकीकरण से मिलेगी स्पष्टता

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त आदेश से कन्वर्जन प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी। पहले ग्रामीण-शहरी सीमा परिवर्तन के बाद कई प्रकरण अटक जाते थे, क्योंकि यह तय नहीं हो पाता था कि अनुमोदन कौन देगा। अब सभी नए आवेदन सीधे नगरीय तंत्र से गुजरेंगे, जिससे प्लानिंग, बिल्डिंग बायलॉज और विकास नीतियों में एकरूपता कायम रहेगी।

सरकार का उद्देश्य यह भी है कि शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों का विकास योजनाबद्ध तरीके से हो, अनियंत्रित प्लॉटिंग या अवैध निर्माण न बढ़े और बुनियादी ढांचा उसी के अनुरूप विकसित किया जा सके।

आदेश लागू होने के बाद अब उन आवेदकों को विशेष रूप से सतर्क रहना होगा, जिनकी फाइलें पुरानी हैं। उन्हें यह जांचना चाहिए कि मांग राशि जमा हुई थी या नहीं, क्योंकि इसी आधार पर उनका प्रकरण जिला प्रशासन या नगरीय निकाय—किसके पास रहेगा—यह तय होगा।

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