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“स्टिंग ऑपरेशन पर जोगेश्वर गर्ग का बयान: हकीकत में कोई लेनदेन नहीं — जांच के बाद ही कार्रवाई”

“स्टिंग ऑपरेशन पर जोगेश्वर गर्ग का बयान: हकीकत में कोई लेनदेन नहीं — जांच के बाद ही कार्रवाई”

मनीषा शर्मा।  जोधपुर में विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन मामले पर महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी। हाल ही में सामने आए इस स्टिंग में विधायक निधि के उपयोग को लेकर कथित अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन के संकेत दिखाए गए थे। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में बहस और सवाल दोनों खड़े कर दिए हैं।

गर्ग बोले जांच के बाद ही होगी कार्यवाही

जोगेश्वर गर्ग ने साफ शब्दों में कहा कि पूरा मामला फिलहाल सदाचार समिति के पास है और समिति ही तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी। उनके अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि आरोप किस हद तक सही हैं और किन पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है, इसलिए हर शिकायत को गंभीरता से देखना जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि नैतिकता का सवाल केवल विधायकों या सांसदों तक सीमित नहीं है। हर नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह कानून और नैतिक मूल्यों के अनुरूप आचरण करे। लेकिन जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि वे जनता का भरोसा लेकर सत्ता और संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने माना कि यदि कोई जनप्रतिनिधि गलती करता है, या लालच में आकर अनुचित काम करता है, तो नियमों में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं।

स्टिंग ऑपरेशन को लेकर उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में “हकीकत में कोई लेनदेन नहीं हुआ था, यह केवल बातचीत का हिस्सा था।” फिर भी उन्होंने माना कि बातचीत के दौरान गलत संकेत या सहमति जैसी बातें भी नैतिकता के विरुद्ध मानी जा सकती हैं। इसलिए जांच जरूरी है, ताकि तथ्य स्पष्ट हों और किसी भी तरह का संदेह न रहे।

जोगेश्वर गर्ग के अनुसार, सदाचार समिति तीनों मामलों का परीक्षण कर रही है और शिकायतों की सत्यता, परिस्थितियों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह मामला सामने आया, उन्होंने तुरंत विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इसे समिति के पास भेजने का अनुरोध किया, जिस पर कार्रवाई भी की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में आरोपी जनप्रतिनिधि रंगे हाथ पकड़े गए बताए जा रहे हैं, लेकिन हर केस की प्रकृति अलग होती है। इसलिए सभी मामलों को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। समिति का काम है कि वह निष्पक्ष तरीके से जांच कर सिफारिश दे, और फिर विधानसभा अध्यक्ष उस पर उचित निर्णय लें।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला एक प्रमुख अखबार के स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आया। गुप्त कैमरे से रिकॉर्ड हुई फुटेज में विधायक निधि के उपयोग में कथित गड़बड़ियों और बड़े वित्तीय लाभ के बदले काम करवाने जैसे आरोप दिखाए गए। इस स्टिंग में खींवसर से बीजेपी विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और बयाना से निर्दलीय विधायक ऋतु बनावट का नाम सामने आया।

वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई और जनता के बीच सवाल उठने लगे कि क्या जनप्रतिनिधि वास्तव में विकास के नाम पर संसाधनों का अनुचित इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी दबाव के बीच मामला सदाचार समिति को सौंपा गया, ताकि तथ्यों की जांच हो सके।

फिलहाल सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है, जबकि झूठे साबित होने पर यह मामला राजनीतिक विवाद भर रह जाएगा।

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