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पचपदरा रिफाइनरी में 2026 से ट्रायल रन, जुलाई से शुरू होगा वाणिज्यिक उत्पादन

पचपदरा रिफाइनरी में 2026 से ट्रायल रन, जुलाई से शुरू होगा वाणिज्यिक उत्पादन

शोभना शर्मा।  नए साल 2026 में राजस्थान सरकार राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजना बाड़मेर जिले की पचपदरा रिफाइनरी में कच्चे तेल के ट्रायल रन की शुरुआत करने जा रही है। लंबे इंतजार और कई बार समयसीमा बदलने के बाद अब यह परियोजना निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। सरकार और कंपनी स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि जनवरी 2026 में रिफाइनरी का पहला चरण राष्ट्र को समर्पित किया जा सके।

सरकारी स्तर पर यह संकेत दिए गए हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी 2026 में राजस्थान दौरे के दौरान पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इससे पहले जनवरी में ही कच्चे तेल का ट्रायल रन शुरू करने की योजना है। हालांकि सरकार और कंपनी दोनों ने स्पष्ट किया है कि यह ट्रायल चरण होगा और पूर्ण वाणिज्यिक उत्पादन के लिए अभी कुछ समय और लगेगा। मौजूदा आकलन के अनुसार रिफाइनरी से कॉमर्शियल प्रोडक्शन जुलाई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।

राजस्थान सरकार ने इस परियोजना को लेकर बजट को मंजूरी दे दी है और बजट घोषणाओं को जमीन पर उतारने की दिशा में इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पचपदरा रिफाइनरी न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक रणनीतिक औद्योगिक परियोजना मानी जा रही है। इसके शुरू होने से राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और राजस्व में बड़ा इजाफा होने की संभावना है।

राज्य सरकार में मंत्री जोगाराम पटेल ने बाड़मेर रिफाइनरी को लेकर मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिफाइनरी परियोजना को संचालित कर रही कंपनी एचआरआरएल ने 24 जुलाई 2025 को लागत संशोधन का प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपा था। परियोजना की लागत में भारी वृद्धि को देखते हुए सरकार ने इसकी पारदर्शिता और व्यवहारिकता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेकॉन लिमिटेड से इसका स्वतंत्र मूल्यांकन कराया।

मेकॉन लिमिटेड की रिपोर्ट और राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष समिति के परीक्षण के बाद कैबिनेट ने राज्यहित को सर्वोपरि रखते हुए संशोधित लागत को मंजूरी दी। इस संशोधित लागत का आंकड़ा करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद यह परियोजना दीर्घकाल में राजस्थान को कई गुना आर्थिक लाभ देगी और इसे रणनीतिक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

पचपदरा रिफाइनरी को लेकर राजनीति भी लगातार चर्चा में रही है। विपक्ष लंबे समय से परियोजना में देरी और लागत बढ़ने को लेकर सवाल उठाता रहा है। सरकार का तर्क है कि यह परियोजना लगभग डेढ़ दशक पुरानी है और इसके पीछे कई जटिल कारण रहे हैं। 18 अप्रैल 2017 को जब इस परियोजना के लिए एमओयू किया गया था, तब इसे पूरा करने की समयसीमा 31 अक्टूबर 2022 तय की गई थी।

हालांकि, इसके बाद कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया की तरह इस परियोजना की गति को भी प्रभावित किया। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, श्रमिकों की कमी, मशीनरी की डिलीवरी में देरी और तकनीकी चुनौतियों के कारण निर्माण कार्य तय समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा कच्चे माल और निर्माण लागत में अप्रत्याशित वृद्धि ने भी परियोजना की समयसीमा और बजट दोनों को प्रभावित किया।

सरकार का दावा है कि अब अधिकांश तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें दूर कर ली गई हैं। रिफाइनरी के प्रमुख यूनिट्स, प्रोसेसिंग सिस्टम, पाइपलाइन नेटवर्क और स्टोरेज टैंकों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। ट्रायल रन के दौरान विभिन्न यूनिट्स की क्षमता, सुरक्षा मानकों और उत्पादन प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा, ताकि वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने से पहले किसी भी संभावित समस्या को दूर किया जा सके।

पचपदरा रिफाइनरी के शुरू होने से बाड़मेर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है। निर्माण चरण में पहले ही हजारों लोगों को रोजगार मिला है, जबकि उत्पादन शुरू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई हजार नए रोजगार पैदा होंगे। इसके साथ ही पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राजस्थान के औद्योगिक नक्शे में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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