शोभना शर्मा। राजस्थान के औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है। बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में बन रही बहुप्रतीक्षित पचपदरा रिफाइनरी परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। वर्षों के लंबे इंतजार, बार-बार बदली समयसीमा और लागत में भारी वृद्धि के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब उद्घाटन के बेहद करीब मानी जा रही है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ इसके लोकार्पण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही राजस्थान को एक नई औद्योगिक पहचान मिलने वाली है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राजस्थान सरकार ने पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा है। सरकार की ओर से मिले संकेतों के मुताबिक जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े में प्रधानमंत्री का राजस्थान दौरा प्रस्तावित है। संभावित कार्यक्रम के तहत 10 जनवरी 2026 को रिफाइनरी के उद्घाटन की तारीख सामने आ रही है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय की स्वीकृति के बाद ही होगा। यदि यह कार्यक्रम तय होता है तो यह राजस्थान के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा।
सरकारी स्तर पर सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनवरी की शुरुआत से पहले रिफाइनरी से जुड़े सभी शेष तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा कार्य पूरे कर लिए जाएं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उद्घाटन के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी या व्यवस्थागत बाधा न आए। इसके लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और प्रोजेक्ट की प्रगति पर सीधी निगरानी रखी जा रही है।
हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद उद्योग मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रेस वार्ता में बताया कि 9 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली इस रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स परियोजना का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला एक मील का पत्थर साबित होगी। मंत्री के अनुसार, रिफाइनरी के मुख्य यूनिट्स, पाइपलाइन नेटवर्क, स्टोरेज टैंक्स और प्रोसेसिंग सिस्टम का काम अंतिम चरण में है। ट्रायल रन और टेस्टिंग की प्रक्रिया भी चरणबद्ध तरीके से की जा रही है, ताकि संचालन के समय किसी तरह की तकनीकी खामी सामने न आए।
पचपदरा रिफाइनरी का सफर काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। इस परियोजना की परिकल्पना सबसे पहले वर्ष 2013 में की गई थी, लेकिन उस समय तकनीकी, वित्तीय और नीतिगत कारणों से यह आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद वर्ष 2017 में नए सिरे से समझौता ज्ञापन किया गया और अक्टूबर 2022 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। हालांकि कोविड-19 महामारी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाएं और निर्माण सामग्री की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि के चलते परियोजना की समयसीमा को पहले जून 2023 तक बढ़ाना पड़ा। इन तमाम अड़चनों के बावजूद अब वर्षों की मेहनत रंग लाती दिख रही है और परियोजना अपने मूर्त रूप में सामने आने को तैयार है।
इस रिफाइनरी परियोजना की लागत में भी समय के साथ बड़ा इजाफा हुआ है। शुरुआत में इसका अनुमानित खर्च 6,331 करोड़ रुपये लगाया गया था, लेकिन निर्माण कार्य, तकनीकी बदलाव और अन्य कारणों से यह लागत बढ़कर 72,937 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। बाद में संशोधित लागत में फिर वृद्धि हुई और अब इस परियोजना की कुल लागत लगभग 79,459 करोड़ रुपये आंकी गई है। बढ़ती लागत के बावजूद राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में राजस्थान सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तय की गई है। इसके तहत राज्य सरकार का कुल निवेश 6,886 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। लागत बढ़ने के कारण राज्य सरकार को अतिरिक्त अंश पूंजी के रूप में 565.24 करोड़ रुपये और निवेश करने होंगे। सरकार का मानना है कि यह निवेश दीर्घकाल में कई गुना लाभ देगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।


