शोभना शर्मा। राजस्थान में कैब और डिलीवरी सेवाओं को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम नियामक कदम उठाया है। परिवहन विभाग की ओर से राजस्थान मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर रूल्स 2025 को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही राज्य में संचालित सभी कैब कंपनियों, टैक्सी सेवाओं और डिलीवरी सर्विस से जुड़े वाहनों को स्पष्ट और सख्त नियमों के दायरे में ला दिया गया है। इन नियमों के लागू होने के बाद OLA, Uber, Rapido जैसी प्रमुख कैब एग्रीगेटर कंपनियों के साथ-साथ फूड और ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा, कैब चालकों की सामाजिक सुरक्षा और सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लंबे समय से कैब सेवाओं को लेकर किराए, सुरक्षा, बीमा और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठती रही है। नए नियमों के जरिए सरकार ने इन सभी पहलुओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की कोशिश की है।
नए नियमों के तहत कैब में यात्रा करने वाले प्रत्येक यात्री के लिए पांच लाख रुपये का बीमा अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि यदि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना या अनहोनी होती है, तो यात्री को बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब तक कई मामलों में हादसों के बाद मुआवजे को लेकर विवाद होते रहे हैं।
इसके साथ ही सभी कैब वाहनों में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य किया गया है। पैनिक बटन की मदद से आपात स्थिति में यात्री तुरंत अलर्ट भेज सकेंगे, जबकि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग से वाहन की रियल टाइम निगरानी संभव होगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा और मजबूत होगी।
कैब चालकों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी नियमों को काफी सख्त किया गया है। राजस्थान मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर रूल्स 2025 के अनुसार, कैब कंपनियों को अपने प्रत्येक चालक का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा चालकों के लिए दस लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस भी जरूरी किया गया है। इससे दुर्घटना, बीमारी या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में चालक और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि कैब और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों लोग असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिनके पास सामाजिक सुरक्षा का कोई ठोस आधार नहीं है। नए नियमों के जरिए इस वर्ग को भी न्यूनतम सुरक्षा कवच देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
यात्रियों की सुविधा और सेवा की जवाबदेही तय करने के लिए कैब बुकिंग कैंसिलेशन पर भी पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। यदि कैब बुक होने के बाद बिना उचित कारण के उसे रद्द किया जाता है, तो नियमों के तहत 100 रुपये तक की पेनल्टी लगाई जा सकेगी। इससे बार-बार कैंसिलेशन की समस्या पर अंकुश लगाने और यात्रियों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इन नए नियमों के तहत राज्य में संचालित सभी कैब कंपनियों और डिलीवरी कंपनियों को पंद्रह दिनों के भीतर परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य किया गया है। बिना लाइसेंस के संचालन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग का कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल नियमों का पालन करने वाली कंपनियां ही राज्य में सेवाएं दे सकें।
परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि इन नियमों को महज सात दिनों के भीतर लागू कराकर विभागीय स्तर पर तेज प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि कैब और डिलीवरी सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनें।


