शोभना शर्मा। राजस्थान के स्कूली शिक्षा तंत्र में अब एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दिवस को स्थायी स्थान मिलने जा रहा है। प्रदेश के सभी स्कूलों में हर वर्ष 28 फरवरी को महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस मनाया जाएगा। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने रविवार को चित्तौड़गढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसकी आधिकारिक घोषणा की। इस निर्णय के तहत शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग में महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस को शामिल किया जाएगा, ताकि इसे शैक्षणिक सत्र के दौरान व्यवस्थित रूप से मनाया जा सके। यह फैसला न केवल राजस्थान के इतिहास और संस्कृति से विद्यार्थियों को जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि इसे नई पीढ़ी में राष्ट्रगौरव और स्वाभिमान की भावना विकसित करने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।
सीपी जोशी की पहल पर सरकार का फैसला
इस निर्णय के पीछे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की अहम भूमिका रही है। उन्होंने पहले सरकार को एक पत्र लिखकर मांग की थी कि महाराणा प्रताप से जुड़े किसी महत्वपूर्ण दिवस को शिविरा पंचांग में इस तरह शामिल किया जाए, जिससे चालू शैक्षणिक सत्र के बीच स्कूली बच्चों के साथ इसे मनाया जा सके। उनका तर्क था कि महाराणा प्रताप राजस्थान के गौरव हैं और उनके शौर्य, त्याग और आत्मसम्मान की गाथा बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। सांसद सीपी जोशी ने चित्तौड़गढ़ मेले में आयोजित एक मंच से भी इस मांग को सार्वजनिक रूप से दोहराया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस अवसर पर बताया कि सीपी जोशी इस विषय में पहले ही सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मौके से ही इस मांग को स्वीकार करते हुए घोषणा कर दी कि 28 फरवरी को महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस के रूप में स्कूल स्तर पर मनाया जाएगा।
शिविरा पंचांग में शामिल होगा आयोजन
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में 28 फरवरी को विशेष आयोजन किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष, बलिदान और आदर्शों से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन केवल युद्ध और वीरता की कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण है। स्कूलों में राज्यारोहण दिवस के आयोजन से बच्चों को इतिहास को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
महाराणा प्रताप का ऐतिहासिक महत्व
महाराणा प्रताप को भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता और स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। मुगल साम्राज्य के दबाव के बावजूद उन्होंने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका राज्यारोहण राजस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसने मेवाड़ की स्वाधीनता की परंपरा को मजबूत किया। शिक्षा विभाग का मानना है कि राज्यारोहण दिवस मनाने से विद्यार्थियों को महाराणा प्रताप के संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समझने में मदद मिलेगी और वे उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकेंगे।
सीएम और शिक्षा मंत्री का सीपी जोशी ने जताया आभार
इस घोषणा के बाद सांसद सीपी जोशी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का आभार जताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति, त्याग और आत्मसम्मान का प्रतीक है। राज्यारोहण दिवस के आयोजन से विद्यार्थियों को उनके जीवन दर्शन और संघर्ष गाथा से प्रेरणा मिलेगी। सीपी जोशी ने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में राष्ट्रगौरव और सांस्कृतिक चेतना का भाव जागृत होगा। यह निर्णय नई पीढ़ी को भारत की गौरवशाली परंपरा और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।
शिक्षा और संस्कृति को जोड़ने की पहल
राज्य सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब स्कूली शिक्षा में भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस का आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम होगा, बल्कि इसे विचार, संवाद और प्रेरणा के मंच के रूप में विकसित करने की योजना है।


