मनीषा शर्मा, अजमेर। अजमेर की महर्षि दयानंद सरस्वती (MDS) यूनिवर्सिटी में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कुलगुरु (VC) प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल को फोन पर धमकाने और अभद्र भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार शाम सिविल लाइंस थाने में इसकी औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई। घटना ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अकादमिक कामकाज पर अनावश्यक दबाव डालने की प्रवृत्ति को भी उजागर किया है।
यूनिवर्सिटी की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कुलगुरु पर नियम विरुद्ध एडमिशन करने का दबाव बनाया। जब कुलगुरु ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों व मानकों के अनुसार ही होगी, तो आरोपी भड़क गया और गाली-गलौज करते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
कॉल पर धमकी, फिर आपत्तिजनक मैसेज
थाना प्रभारी शंभूसिंह के मुताबिक, रिपोर्ट यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार कैलाशचंद्र शर्मा की ओर से दी गई, जिसे कुलगुरु के निजी सहायक स्वतंत्र कुमार शर्मा ने दर्ज कराया। शिकायत में कहा गया कि यूनिवर्सिटी से संबद्ध अभिषेक कॉलेज, दतवास निवाई (टोंक) के निदेशक राजेश गुर्जर के कहने पर जयपुर के सांगानेर निवासी दातारसिंह ने कुलगुरु को फोन किया।
आरोपी ने कॉलेज के छात्रों के एडमिशन नहीं होने पर नाराजगी जताई और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए धमकी दी। कुलगुरु ने शांतिपूर्वक समझाया कि प्रवेश प्रक्रिया केवल नियमों के अनुसार हो सकती है, लेकिन इसके बाद आरोपी ने दोबारा धमकियां दीं। फोन काटने के बाद आरोपी ने कई संदेश भेजे, जिनमें गाली-गलौज और डराने-धमकाने वाले शब्द लिखे थे। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी लगातार अपनी ‘ऊपर तक पहचान’ का हवाला देता रहा।
पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे राजकार्य में बाधा डालने की श्रेणी में दर्ज किया और जांच की जिम्मेदारी एसआई भीम सिंह को सौंपी है। फिलहाल आरोपी की कॉल डिटेल्स, मैसेज और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है।
कुलगुरु से संपर्क नहीं हो पाया
मीडिया ने इस संबंध में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वे शैक्षणिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे और मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
यूनिवर्सिटी के अधिकार क्षेत्र में कई जिले
महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के अधीन अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, नागौर, ब्यावर, कुचामन-डीडवाना सहित कई जिलों के सरकारी और निजी कॉलेज आते हैं। इन सभी कॉलेजों में संचालित पाठ्यक्रमों की मान्यता, परीक्षा प्रणाली और एडमिशन संबंधी अंतिम निर्णय यूनिवर्सिटी स्तर पर लिए जाते हैं। यही कारण है कि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है।
नियम विरुद्ध प्रवेश पर सख्ती
सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में कई निजी कॉलेजों पर नियमों से बाहर जाकर एडमिशन लेने के आरोप लगते रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार यह स्पष्ट करता आया है कि बिना योग्यता, सीट सीमा या मान्यता के बाहर किसी भी छात्र को प्रवेश देना गंभीर उल्लंघन है। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई संभव होती है। इस घटना को उसी सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि जब विश्वविद्यालय ने संबंधित कॉलेज के एडमिशन प्रस्ताव को नियमों के अनुरूप नहीं पाया, तो दबाव बनाने की कोशिश की गई।
शिक्षण संस्थानों में दबाव की प्रवृत्ति चिंता का विषय
यह मामला केवल एक फोन कॉल का नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है जिसमें अकादमिक निर्णयों पर बाहरी दखल की कोशिश की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन दबाव के आगे झुक जाए, तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और योग्यता आधारित प्रवेश प्रणाली पर भारी असर पड़ता है। अकादमिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को सख्ती से रोकना जरूरी है ताकि शिक्षण संस्थानों का वातावरण सुरक्षित और निष्पक्ष बना रहे।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस ने मोबाइल रिकॉर्ड, संदेश और संबंधित लोगों के बयान एकत्रित करने शुरू कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद आरोप तय किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कुलगुरु और अधिकारियों की सुरक्षा तथा स्वतंत्र कार्यप्रणाली से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मामला बढ़ने के साथ-साथ यह चर्चा का विषय भी बन गया है कि शिक्षा संस्थानों में नियमों से छेड़छाड़ कर दबाव बनाने वालों पर अब कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


