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डोटासरा का सीएम पर वार: अरावली, भ्रष्टाचार और चुनाव टालने पर तीखे सवाल

डोटासरा का सीएम पर वार: अरावली, भ्रष्टाचार और चुनाव टालने पर तीखे सवाल

मनीषा शर्मा।  जयपुर में आयोजित कांग्रेस स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अरावली बचाओ और एसआईआर के खिलाफ जिलों में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए थे। हालांकि जिन आठ जिलों में यह कार्यक्रम नहीं हो सके, उन जिला कांग्रेस कमेटियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। डोटासरा ने साफ कहा कि पार्टी यह जानेगी कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि वहां जनता से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए।

सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भाषणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से हम यह सुनते आ रहे हैं कि सरकार ने भ्रष्टाचार रोक दिया है और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। लेकिन यदि वास्तव में ऐसा है, तो सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही जिन पर आरोप लगाए जाते हैं। डोटासरा के अनुसार, सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार रोकने के बजाय “डबल इंजन की सरकार” ने इसे और बढ़ाने का काम किया है।

अरावली पर गंभीर आरोप

डोटासरा ने अरावली पर्वतमाला से जुड़े फैसलों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अरावली की परिभाषा में जो बदलाव किया गया है, वह जनता के हित में नहीं, बल्कि खनन माफिया के लिए किया गया कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास राष्ट्रहित की कोई स्पष्ट सोच नहीं है, बल्कि सत्ता में आने के बाद वह केवल हर संभव तरीके से लाभ उठाने पर तुली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कई वर्षों बाद सत्ता मिलने के कारण कुछ लोग दोनों हाथों से “लूटने” का काम कर रहे हैं। डोटासरा के इन बयानों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह तो बढ़ाया, लेकिन साथ ही राजनीतिक तापमान भी और ज्यादा चढ़ गया।

“जायज काम भी बिना भ्रष्टाचार के नहीं”

डोटासरा ने प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रोज़ ईमानदारी की बातें करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि न तो मंत्री ईमानदारी से काम कर रहे हैं और न ही अफसर। उनके अनुसार, आज अगर कोई व्यक्ति किसी अधिकारी के पास जायज काम लेकर भी पहुंचता है, तो बिना भ्रष्टाचार के वह काम पूरा होना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि यही हालात सरकारी तंत्र में गहराई तक फैल चुके हैं, और जनता इसका सीधा खामियाजा भुगत रही है।

लोकतंत्र और चुनावों पर भी टिप्पणी

डोटासरा ने राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव टलने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को नौ महीने के भीतर चुनाव करवा देने चाहिए थे, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए। उनके अनुसार, जो लोग लोकतंत्र की रक्षा का दावा करते हैं, वही लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जनता की सरकार वास्तव में जनहित में काम कर रही है, तो उसे चुनावों से डरने की जरूरत क्यों है।

टिकट केवल विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं को

कार्यक्रम में जब यह सवाल उठा कि कांग्रेस स्थापना दिवस के मौके पर कई विधायक और सांसद नज़र नहीं आए, तो डोटासरा ने इस पर भी बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ नेता चुनाव के समय टिकट लेकर आते हैं, जीतते हैं और फिर पांच साल के लिए गायब हो जाते हैं।

डोटासरा के अनुसार, अब यह सिलसिला खत्म होगा। आगे से टिकट उसी व्यक्ति को मिलेगा जो कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा रहेगा और पार्टी के हर कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन ऐसे लोगों को आगे बढ़ाएगा जो केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल के दौरान जनता और पार्टी दोनों के साथ खड़े रहें। डोटासरा का यह बयान संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है और साथ ही उन नेताओं के लिए चेतावनी भी है जो केवल अवसर देखकर सक्रिय होते हैं।

जिलों को नोटिस, राजनीतिक बहस तेज

अरावली मुद्दे से लेकर भ्रष्टाचार और टिकट वितरण नीति तक, डोटासरा के इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस के कार्यक्रम न कराने वाले जिलों को नोटिस देने की घोषणा यह संकेत देती है कि पार्टी अब संगठनात्मक ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।  वहीं, भाजपा समर्थक इन बयानों को राजनीतिक आरोप बताते हुए इसे कांग्रेस की निराशा का परिणाम बता रहे हैं। हालांकि, डोटासरा का तर्क है कि विपक्ष का कर्तव्य ही सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और जनता की आवाज़ को ताकत देना है।

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