मनीषा शर्मा, अजमेर। राजकीय जवाहर लाल नेहरू (JLN) मेडिकल कॉलेज, अजमेर ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर शनिवार से दो दिवसीय हीरक जयंती समारोह की शुरुआत हुई, जिसमें कॉलेज के गौरवशाली इतिहास, चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। शुभारम्भ समारोह में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, विधायक अनिता भदेल सहित देश-विदेश में कार्यरत सैकड़ों पूर्व छात्र और नामचीन डॉक्टर शामिल हुए। कार्यक्रम ने न केवल भावनात्मक स्मृतियों को ताजा किया, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों और मानवीय संवेदनाओं की जरूरत पर भी बल दिया।
मुख्य अतिथि वासुदेव देवनानी ने चिकित्सकीय सेवा को मानवता का सबसे बड़ा दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल उपचार ही नहीं करता, बल्कि अपने स्नेह, अपनत्व और संवेदनशील व्यवहार से रोगी में विश्वास और हिम्मत पैदा करता है। यही भावना मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने का सबसे बड़ा मंत्र बन जाती है। देवनानी ने कॉलेज के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1851 में एक डिस्पेंसरी के रूप में शुरुआत हुई, 1895 में यह बड़ा अस्पताल बना और 1965 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। आज यह संस्थान प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा केंद्र बन चुका है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में अजमेर के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को मंजूरी दी है। 190 करोड़ रुपए की लागत से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा, जिससे मरीजों को अब जयपुर या दिल्ली जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज भवन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष जल्द पूरा किया जाएगा। साथ ही जेएलएन अस्पताल के जीर्णोद्धार के लिए 50 करोड़ रुपए और कोटड़ा क्षेत्र में सैटेलाइट अस्पताल के निर्माण को भी गति दी जा रही है। देवनानी ने चिकित्सकों से कॉलेज की उन्नति में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया और कहा कि जीनोमिक्स, रोबोटिक सर्जरी और एआई आधारित उपचार जैसी तकनीकों को तेजी से अपनाना समय की मांग है। उन्होंने वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ. एस.के. अरोड़ा, डॉ. एस.आर. मित्तल और डॉ. एल.के. नेपालिया के योगदान को स्मरण करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राजस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सा क्षेत्र को हजारों करोड़ रुपए का बजट मिला है और आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में 50 हजार से अधिक चिकित्सा कर्मचारियों की भर्ती की गई है, जिनमें चिकित्सक, नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। सरकार प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। खींवसर ने बड़े अस्पतालों से ग्रामीण क्षेत्रों में भी सेवाएँ देने की अपील करते हुए कहा कि तहसील स्तर पर उपचार सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है।
अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल ने कॉलेज की उपलब्धियों, परंपराओं और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आज आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और उन्नत तकनीकों का केंद्र बन चुका है। बदलते समय के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार और शोध की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भदेल ने कहा कि कॉलेज से शिक्षा प्राप्त कर देश-विदेश में कार्यरत चिकित्सकों की सफलता यहां अध्ययनरत छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनका अनुभव और सेवाभाव आने वाली पीढ़ी के डॉक्टरों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रोत्साहित करेगा।
उन्होंने बताया कि 60 वर्ष पूर्व कॉलेज संसाधनों की दृष्टि से सीमित था, लेकिन आज यह आधुनिक तकनीकों के साथ बड़ी बीमारियों से निपटने में सक्षम संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है। नई बीमारी और जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। राज्य सरकार के प्रयासों से मरीजों को बेहतर, त्वरित और सुलभ इलाज उपलब्ध हो रहा है।
समारोह में राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉ. अशोक कुमार कालवाड़, प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज की यात्रा, उपलब्धियां और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए गए। साथ ही भामाशाहों और चिकित्सकों को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।


