मनीषा शर्मा। अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि 29 दिसंबर से पूरे अरावली क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ व्यापक और संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वन, पर्यावरण और खान विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि अरावली प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है और इसके संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पर्वतमाला के स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यावरण, भूजल संरक्षण और जैव विविधता के लिए जीवनरेखा है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता इसे सुरक्षित रखना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए खनन को अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों को भी समान रूप से लागू किया जाएगा। इन निर्देशों का उद्देश्य है कि अनियमित खनन पर रोक लगे और पर्वतमाला का प्राकृतिक संतुलन लंबे समय तक बना रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करा रही है। खनन लीज जारी करने से लेकर मॉनिटरिंग तक, हर स्तर पर पर्यावरणीय मानकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अरावली को हराभरा बनाने के लिए सरकार ने 250 करोड़ रुपये की हरित अरावली विकास परियोजना भी शुरू की है। इस परियोजना के अंतर्गत अरावली से जुड़े जिलों में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है। सरकार का मानना है कि वृक्षारोपण के माध्यम से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी, मिट्टी और पानी का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।
अवैध खनन के खिलाफ प्रस्तावित अभियान 29 दिसंबर से शुरू होकर 15 जनवरी तक चलेगा। इस अवधि में खान, राजस्व, पुलिस, परिवहन और वन विभाग की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी करेंगी। जहां भी अवैध खनन, अवैध परिवहन या खनन सामग्री का अवैध भंडारण पाया गया, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान की मॉनिटरिंग जिला कलेक्टर स्तर पर की जाएगी। खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने सभी जिलों के माइनिंग इंजीनियरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि टीमें नियमित गश्त करें, संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत रिपोर्ट तैयार करें और आवश्यकतानुसार जब्तियां तथा मुकदमे दर्ज करें।
विशेष बात यह है कि सरकार इस अभियान को केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसका उद्देश्य लोगों में यह संदेश देना भी है कि प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। सरकार चाहती है कि स्थानीय समुदाय, पंचायतें और सामाजिक संस्थाएं भी इस संरक्षण अभियान का हिस्सा बनें।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली को बचाए बिना राजस्थान में भूजल स्तर, मौसमीय संतुलन और कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पिछले कई वर्षों से अनियमित खनन ने पर्वतमाला के बड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में सरकार का यह कदम पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, यह अभियान कितना प्रभावी रहेगा, यह आने वाले समय में ही साफ होगा। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध खनन नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और लंबे समय तक निगरानी बनाए रखना है। फिर भी, सरकार का कहना है कि सख्त कार्रवाई और निरंतर मॉनिटरिंग के जरिए अरावली की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।


