मनीषा शर्मा। राजस्थान में होने वाले आने वाले पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी महिला मतदाता को घूंघट, पर्दा या बुर्का पहने हुए सीधे वोट डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हर महिला मतदाता को पहले अपनी पहचान सत्यापित करानी होगी, उसके बाद ही उसे मताधिकार का उपयोग करने दिया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से लागू व्यवस्था को दोबारा स्पष्ट किया गया है। आयोग के अनुसार, सभी चुनाव—चाहे लोकसभा हों, विधानसभा हों या स्थानीय निकाय के—एक ही सिद्धांत पर चलते हैं, जिसमें वोटर की पहचान अनिवार्य होती है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि मतदान केंद्र पर सबसे पहले वोटर सूची में दर्ज नाम के साथ फोटो मैच किया जाता है। लेकिन कई बार महिला मतदाताओं के मामले में मुश्किलें सामने आती हैं, क्योंकि वे सामाजिक परंपराओं के कारण चेहरा दिखाने में हिचकिचाती हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति अधिक देखने को मिलती है। ऐसे मामलों में पहचान को लेकर विवाद पैदा हो जाते हैं, जिनसे मतदान प्रक्रिया प्रभावित होती है।
इन्हीं विवादों से बचने और मतदान प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आयोग ने महिला कर्मचारियों के सहयोग की व्यवस्था की है। यदि पोलिंग बूथ पर सभी कर्मचारी पुरुष हों और महिला मतदाता घूंघट या बुर्का हटाने से संकोच करे, तो पहचान की प्रक्रिया महिला कर्मचारी की मौजूदगी में करवाई जाएगी। इससे न केवल मतदाता को सहज माहौल मिलेगा, बल्कि मतदान कर्मियों को भी पहचान सुनिश्चित करने में आसानी होगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार आयोग ने पोलिंग पार्टी में महिलाओं की ड्यूटी नहीं लगाने का फैसला भी किया है। यानी मतदान कराने वाली टीम में केवल पुरुष कर्मचारी मौजूद रहेंगे। ऐसे में पहचान की प्रक्रिया के लिए स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिला कर्मियों की मदद ली जाएगी। इनमें ग्राम सेविका, महिला शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी के कार्यालय की महिला कर्मचारी या अन्य स्थानीय महिला अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है।
आयोग का तर्क है कि स्थानीय महिला कर्मचारी क्षेत्र और मतदाताओं को बेहतर तरीके से जानती हैं। इसलिए उनके सहयोग से पहचान प्रक्रिया जल्दी और बिना विवाद पूरी हो सकेगी। साथ ही, यह व्यवस्था महिलाओं की गरिमा और पारंपरिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए मतदान को निष्पक्ष बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, वोट डालने के लिए वोटर आईडी कार्ड या कोई मान्यता प्राप्त पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य है। कई बार परिवार के साथ आईं महिलाएं केवल वोटर स्लिप लेकर पहुंच जाती हैं, लेकिन पहचान पत्र न होने पर उन्हें मतदान से रोकना पड़ता है। इसलिए आयोग ने अपील की है कि हर मतदाता अपने साथ वैध पहचान पत्र अवश्य लाए।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम पारदर्शिता को मजबूत करता है और फर्जी मतदान की संभावना कम करता है। हालांकि, ग्रामीण महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया थोड़ी असहज हो सकती है, लेकिन महिला कर्मियों की मौजूदगी इसे सरल बनाने में मदद करेगी।
आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र मतदाता स्वतंत्र रूप से, सुरक्षित माहौल में और नियमों के अनुसार मतदान कर सके। प्रशासन का कहना है कि अगर पहचान संबंधी किसी भी विवाद की स्थिति बनती है, तो उसे मौके पर ही शांतिपूर्वक सुलझाया जाएगा, ताकि मतदान की प्रक्रिया बाधित न हो। आने वाले दिनों में आयोग द्वारा मतदानकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें महिला मतदाताओं की पहचान, संवेदनशीलता और विवाद निपटान जैसे मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।


