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ट्रेन टिकट महंगा या सस्ता? रेलवे के नए किराए समझिए

ट्रेन टिकट महंगा या सस्ता? रेलवे के नए किराए समझिए

शोभना  शर्मा।  भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक अहम फैसला लेते हुए ट्रेन किराए में आंशिक बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह बदलाव एकसमान रूप से सभी यात्रियों पर लागू नहीं किया गया है, बल्कि चुनिंदा दूरी और श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय यात्रियों पर न्यूनतम बोझ डालते हुए रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और परिचालन लागत को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है। रेलवे का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महंगाई और ईंधन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद रेलवे ने यह स्पष्ट किया है कि आम और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बढ़ोतरी से सुरक्षित रखा गया है, ताकि उनकी जेब पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

उपनगरीय ट्रेनों और MST यात्रियों को बड़ी राहत

रेलवे ने महानगरों और शहरी क्षेत्रों के आसपास चलने वाली उपनगरीय ट्रेनों के किराए में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया है। इसके साथ ही मासिक सीजन टिकट यानी MST धारकों के लिए भी पुराने किराए ही लागू रहेंगे। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए राहत भरा है जो रोजाना नौकरी, व्यापार या पढ़ाई के लिए ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं।   मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली जैसे शहरों में रोजाना लाखों लोग लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। यदि इन ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी होती, तो इसका सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ता। रेलवे ने इस वर्ग को प्राथमिकता देते हुए उन्हें पूरी तरह से किराया बढ़ोतरी से बाहर रखा है।

215 किलोमीटर तक साधारण श्रेणी का किराया जस का तस

रेलवे ने साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी राहत दी है। इस दूरी तक टिकट की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जो कम दूरी के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोग। रेलवे का मानना है कि कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ट्रेन अब भी सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन है। इसलिए इस श्रेणी में किराया न बढ़ाकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाई गई है।

लंबी दूरी पर साधारण श्रेणी में मामूली बढ़ोतरी

हालांकि, 215 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाले साधारण श्रेणी के यात्रियों को अब प्रति किलोमीटर एक पैसा अतिरिक्त देना होगा। यह बढ़ोतरी बेहद सीमित है और इसका उद्देश्य रेलवे की बढ़ती परिचालन लागत की आंशिक भरपाई करना बताया गया है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री 500 किलोमीटर की यात्रा करता है, तो उसे केवल कुछ रुपये अतिरिक्त देने होंगे। रेलवे का तर्क है कि इतनी मामूली वृद्धि से यात्रियों पर बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि रेलवे को सेवाओं में सुधार के लिए आवश्यक संसाधन मिल सकेंगे।

मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि

मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को इस फैसले का अपेक्षाकृत ज्यादा असर महसूस हो सकता है। रेलवे ने स्लीपर, नॉन एसी और एसी सभी श्रेणियों में प्रति किलोमीटर दो पैसे की बढ़ोतरी लागू की है। यदि कोई यात्री मेल या एक्सप्रेस ट्रेन से 500 किलोमीटर की यात्रा करता है, तो उसे करीब 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि यह राशि बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के खर्च में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर होगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस वृद्धि से यात्रियों को बेहतर कोच, साफ-सफाई, समयबद्धता और सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

यात्रियों और रेलवे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

रेलवे का दावा है कि यह किराया संशोधन पूरी तरह संतुलित और व्यावहारिक है। जहां एक ओर रोजमर्रा के यात्रियों और छोटी दूरी के सफर करने वालों को पूरी तरह राहत दी गई है, वहीं लंबी दूरी के यात्रियों से बेहद सीमित योगदान लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेलवे को आधुनिक तकनीक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करनी है, तो समय-समय पर ऐसे छोटे बदलाव जरूरी हो जाते हैं। कुल मिलाकर, भारतीय रेलवे की यह किराया बढ़ोतरी न तो अचानक है और न ही भारी। यह फैसला आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसमें राहत और जिम्मेदारी दोनों का संतुलन साफ तौर पर नजर आता है।

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