शोभना शर्मा। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का शुक्रवार को कोटपूतली में जोरदार स्वागत किया गया। सीकर से अलवर जाते समय पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह उनका अभिनंदन किया। कार्यकर्ताओं ने माला और साफा पहनाकर डोटासरा का स्वागत किया और कांग्रेस के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान डोटासरा ने महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और सामाजिक न्याय व समानता के उनके विचारों को याद किया।
मीडिया से बातचीत में गोविंद सिंह डोटासरा ने हाल ही में चौमूं में मस्जिद के बाहर हुए बवाल को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि यदि समय रहते हालात को संभाला जाता, तो तनाव की स्थिति पैदा ही नहीं होती। डोटासरा ने चौमूं थानाधिकारी प्रदीप शर्मा पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ गतिविधियों के जरिए उन्हें अनावश्यक लोकप्रियता मिल गई है, जिससे उन्हें यह भ्रम होने लगा है कि वे चुनाव लड़ सकते हैं।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर लंबे समय से हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है, वहां जानबूझकर कार्रवाई करना अधिकारों का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम में जो भी हुआ, वह गलत है, चाहे वह पुलिस के साथ हुआ हो या आम नागरिकों के साथ। कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी या पक्षपात समाज में तनाव पैदा करता है।
इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार जनहित के मुद्दों से भटक चुकी है और केवल संसाधनों पर कब्जा कराने का काम कर रही है। डोटासरा ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही “अरावली बचाओ अभियान” के तहत पूरे प्रदेश में रैलियों और जनआंदोलनों का आयोजन करेगी। उनका कहना था कि अरावली पर्वतमाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन सरकार इसे खनन माफियाओं के हवाले करने पर तुली हुई है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि अवैध खनन को खुला संरक्षण दिया जा रहा है और अरावली की आत्मा पर सीधा प्रहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे केवल खनन माफियाओं को फायदा मिल रहा है, जबकि आम आदमी, किसान और छोटे व्यापारी परेशान हैं। राज्य में न तो ठोस विकास कार्य दिखाई दे रहे हैं और न ही आम जनता को किसी प्रकार का वास्तविक लाभ मिल रहा है।
खनन लीज के मुद्दे पर बोलते हुए पीसीसी चीफ ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी 52 खनन लीज माफियाओं को देने के लिए टेंडर निकाल दिए गए। डोटासरा ने पूछा कि कोर्ट के फैसले से पहले ही सरकार ने ऐसी तैयारी कैसे कर ली। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार पहले से ही कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने की योजना बना चुकी थी।
बेरोजगारी के मुद्दे पर भी गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं के साथ वादाखिलाफी की गई है। चुनाव से पहले युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार उन वादों को भूल गई। कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई कई जनकल्याणकारी योजनाओं को या तो कमजोर कर दिया गया है या पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिससे आम जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अतिवृष्टि मुआवजे को लेकर भी डोटासरा ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायकों के क्षेत्रों में किसानों को पूरा मुआवजा दिया गया, जबकि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में किसानों को मुआवजे से वंचित रखा गया। यह सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है और राजनीति से प्रेरित फैसला है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा में प्रभावित किसान किसी पार्टी के नहीं होते, लेकिन सरकार ने राहत वितरण में भी राजनीति की।
इसके साथ ही डोटासरा ने मनरेगा और राइट टू वर्क जैसी योजनाओं को कमजोर करने या खत्म करने की साजिश का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं ग्रामीण और गरीब वर्ग के लिए जीवनरेखा हैं, लेकिन सरकार इन्हें बोझ मानकर खत्म करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक इन मुद्दों को उठाएगी और जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेगी।
कोटपूतली दौरे के दौरान डोटासरा के तेवर साफ संकेत दे रहे थे कि आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी जनता के मुद्दों पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रहेगी।


