मनीषा शर्मा। जयपुर के सिंधी कैंप स्थित राजपूत छात्रावास को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद आखिरकार शनिवार को हिंसा में बदल गया। आरोप है कि देर शाम छात्रावास पर जबरन कब्जे की कोशिश के दौरान आगजनी और तोड़फोड़ की बड़ी घटना को अंजाम दिया गया। इससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि उपद्रवियों ने छात्रावास के वार्डन के कमरे नंबर 51 में जबरन घुसकर आग लगा दी, जिसके कारण कमरे में रखे कई जरूरी दस्तावेज, रजिस्टर, कपड़े और करीब 30 हजार रुपये नकद जलकर राख हो गए।
घटना के समय छात्रावास के अन्य हिस्सों में भी हड़कंप मच गया। छात्रों और आसपास के लोग किसी तरह बाहर निकले। आगजनी के बाद उपद्रवी मौके से भागने से पहले सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर भी साथ ले गए, जिससे घटना से जुड़े साक्ष्यों के मिटाए जाने की आशंका और गहरी हो गई है। यह पूरी वारदात एक सोचे-समझे प्रयास की तरह दिखाई दी, जिसने छात्रावास प्रशासन और स्थानीय समुदाय दोनों को चिंता में डाल दिया।
पुलिस पहुंची तो खुला दरवाजा, गुढ़ा के मौजूद होने के आरोप
घटना की जानकारी मिलते ही जालूपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुलिस को देखते ही हॉस्टल का दरवाजा खोला गया और बाहर आने वालों में कई नामचीन चेहरे भी दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी वहां मौजूद थे और वे सौ से अधिक लोगों के साथ छात्रावास पहुंचे थे। यह दावा क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इतने बड़े समूह का छात्रावास में पहुंचना और उसके बाद आगजनी-तोड़फोड़ जैसी घटनाओं का होना, पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि वहां मौजूद लोग किस उद्देश्य से आए थे और किसकी अगुवाई में यह घटनाक्रम हुआ।
दर्ज हुआ मुकदमा, गंभीर धाराओं में कार्रवाई
राजपूत सभा भवन के महामंत्री धीर सिंह शेखावत की ओर से जालूपुरा थाने में मामला दर्ज कराया गया। दर्ज एफआईआर में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, बद्री सिंह राजावत समेत एक दर्जन से अधिक लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। उन पर आगजनी, तोड़फोड़, जबरन कब्जा करने की कोशिश और भारतीय मुद्रा जलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं को देखते हुए मामला केवल आपराधिक उपद्रव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति, सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बन जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
विवाद की जड़: छात्रावास के स्वामित्व और नियंत्रण का मसला
सूत्र बताते हैं कि राजपूत छात्रावास को लेकर तोरावाटी शेखावाटी भोमिया संघ और राजपूत सभा भवन के बीच लंबे समय से स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश करते रहे हैं। कई बार बैठकों और बातचीत का प्रयास भी हुआ, लेकिन स्पष्ट समाधान सामने नहीं आ पाया। समय-समय पर तनाव बढ़ता रहा और अंततः इसी तनाव ने शनिवार की घटना का रूप ले लिया। छात्रावास से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थान छात्रों के आवास और अध्ययन के लिए बनाया गया था, लेकिन विवाद के कारण यहां का माहौल लगातार अस्थिर बना हुआ है।
इलाके में तनाव, पुलिस जांच में जुटी
घटना के बाद सिंधी कैंप और आसपास के क्षेत्रों में तनाव फैल गया। कई लोग देर रात तक इकट्ठा रहे और स्थिति पर नजर बनाए रहे। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने के साथ अतिरिक्त फोर्स तैनात की, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। जालूपुरा थाना पुलिस ने मौके का मुआयना कर फॉरेन्सिक टीम को भी बुलाया। हालांकि सीसीटीवी सिस्टम और डीवीआर गायब होने के कारण जांच में बाधा आ सकती है, लेकिन पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी।
छात्र चिंतित, प्रशासन से सुरक्षा की मांग
छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने घटना के बाद गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पढ़ाई के लिए बने इस हॉस्टल का राजनीतिक और सामाजिक खींचतान का केंद्र बन जाना उनके लिए मानसिक दबाव पैदा करता है। कई छात्रों ने प्रशासन से यह मांग की कि हॉस्टल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए। छात्रों का तर्क है कि इस तरह की घटनाओं का सीधा असर उनके अध्ययन, परीक्षाओं और भविष्य पर पड़ता है। यदि छात्रावास में असुरक्षा का माहौल कायम रहा, तो यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।


