मनीषा शर्मा। राजस्थान की जीवनरेखा कही जाने वाली अरावली पर्वतमाला को बचाने की मांग ने प्रदेश की राजनीति में फिर से हलचल मचा दी है। अवैध खनन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के खिलाफ राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने राजधानी जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया। जालूपुरा से कलेक्ट्रेट तक निकाला गया यह पैदल मार्च केवल छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि अरावली संरक्षण के लिए एक व्यापक आवाज के रूप में देखा जा रहा है।
इस रैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत हजारों युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। बड़ी बात यह रही कि इस मार्च में पहली बार सचिन पायलट के बेटे अरहान पायलट भी दिखाई दिए, जिसे कई राजनीतिक विश्लेषक एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं — कि अरावली का मुद्दा केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
अरावली: प्रदेश की “जीवनरेखा”
अरावली पर्वतमाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के जल, जलवायु और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह रेगिस्तानी क्षेत्रों में हरियाली बनाए रखने, भूजल recharge में मदद करने और धूल-आंधी को रोकने का काम करती है। लंबे समय से अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्यों ने इस पर्वतमाला को गंभीर खतरे में डाल दिया है। पर्यावरणविदों के अनुसार, अगर अरावली का नुकसान इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर सीधे तौर पर खेती, जल संकट और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
“किसके आदेश से चल रहा यह खेल?”
कलेक्ट्रेट पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अरावली की सुरक्षा के बजाय उसे धीरे-धीरे खतरों की ओर धकेल रही है। पायलट ने सवाल उठाया कि आज भी सैकड़ों स्थानों पर अवैध खनन खुलेआम चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे बताना चाहिए कि आखिर यह खनन किसके इशारे पर हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल अदालत में जाकर प्रतिबंध लगाने की बात कहना पर्याप्त नहीं है। असली काम अरावली का संरक्षण, पेड़ लगाने और अवैध गतिविधियों पर सख्त रोक लगाने से होगा। उनके अनुसार, खनन माफियाओं पर कार्रवाई के बिना “बैन” महज कागजी कदम बनकर रह जाता है।
अरहान पायलट का संदेश: “Gen-Z भी जागरूक”
रैली में युवा चेहरों की भारी मौजूदगी ने आंदोलन को विशेष बना दिया। अरहान पायलट ने कहा कि इस रैली में बड़ी संख्या में “Gen-Z” जुड़ा हुआ है और यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी पर्यावरण, जंगलों और प्राकृतिक धरोहरों के मुद्दों को लेकर संवेदनशील है। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अरावली का सवाल सिर्फ वर्तमान राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि भावी समाज और आने वाले वर्षों की पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
“चेहरे बदलो, नीति नहीं” — पायलट का तंज
अपने संबोधन में सचिन पायलट ने कहा कि सरकार आकड़ों और घोषणाओं के सहारे जनता को भ्रमित करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता का दबाव जब एकजुट होकर सामने आता है, तो सबसे मजबूत सरकारों को भी झुकना पड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि अरावली संरक्षण पर समझौता संभव नहीं है और अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
छात्र और युवाओं की सक्रिय भूमिका
NSUI के बैनर तले आयोजित यह पैदल मार्च युवाओं की बदलती सोच को भी दर्शाता है। पहले जहां छात्र आंदोलनों का केंद्र रोजगार, फीस या शिक्षण संस्थानों की समस्याओं पर होता था, वहीं अब पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का मुद्दा भी बड़ी प्राथमिकता बनता दिख रहा है। युवा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए मांग की कि अरावली क्षेत्र को “नो-माइनिंग ज़ोन” घोषित किया जाए और जिन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां चल रही हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो।
प्रशासन और सरकार के सामने चुनौती
यह आंदोलन सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अरावली संरक्षण अब राजनीतिक बहस भर नहीं रहा। यह जनआंदोलन का रूप ले सकता है। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाए। यदि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और पुनर्वनीकरण जैसे कदम समय रहते नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


