शोभना शर्मा। राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर में इन दिनों पर्यटन के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी किसी उत्सव से कम नहीं है। जिले की प्रसिद्ध देगराय ओरण क्षेत्र में हजारों की संख्या में विदेशी पक्षियों ने डेरा डाल लिया है। खास बात यह है कि यहां दुनिया के सबसे विशालकाय पक्षियों में गिने जाने वाले सिनेरियस गिद्ध और यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध सैकड़ों की तादाद में देखे जा रहे हैं। इन दुर्लभ और प्रभावशाली पक्षियों की मौजूदगी ने देगराय ओरण को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी प्रवास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
देगराय ओरण लंबे समय से स्थानीय समुदाय और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आस्था और संरक्षण का प्रतीक रहा है। हर साल सर्दियों के मौसम में यहां प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ जाती है, लेकिन इस बार विदेशी गिद्धों की संख्या और विविधता ने सभी को आकर्षित किया है। दूरबीन और कैमरों के साथ देश-विदेश से आने वाले पक्षी प्रेमी इन विशालकाय गिद्धों को नजदीक से देखने के लिए देगराय ओरण का रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये गिद्ध मुख्य रूप से स्पेन, तिब्बत, मंगोलिया और कजाकिस्तान जैसे देशों से हजारों मील का लंबा सफर तय कर जैसलमेर पहुंचते हैं। जब मध्य एशिया और यूरोप के इन क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण भोजन की भारी कमी हो जाती है, तब ये पक्षी अपेक्षाकृत गर्म और सुरक्षित इलाकों की तलाश में प्रवास करते हैं। थार का रेगिस्तान, विशेषकर देगराय ओरण क्षेत्र, इनके लिए उपयुक्त ठिकाना साबित होता है।
सिनेरियस गिद्ध और यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध अपनी विशाल कद-काठी और चौड़े पंखों के लिए जाने जाते हैं। उड़ान के दौरान इनका फैलाव कई मीटर तक होता है, जिससे आकाश में इनकी मौजूदगी बेहद प्रभावशाली नजर आती है। ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि मृत पशुओं को खाकर ये वातावरण को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि देगराय ओरण में इन पक्षियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्र अब भी प्राकृतिक रूप से सुरक्षित और अनुकूल बना हुआ है। स्थानीय लोगों द्वारा ओरण की परंपरागत रूप से रक्षा किए जाने और यहां शिकार जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण का सकारात्मक असर अब साफ दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि विदेशी पक्षी हर साल यहां लौटकर आते हैं।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह नजारा जैसलमेर के लिए खास है। आमतौर पर जैसलमेर को किले, रेगिस्तान और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब वन्यजीव और पक्षी पर्यटन भी यहां एक नई पहचान बना रहा है। देगराय ओरण में प्रवासी गिद्धों की मौजूदगी न केवल जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि थार का रेगिस्तान केवल रेत का सागर नहीं, बल्कि जीवन और संरक्षण का अहम केंद्र है।
आने वाले महीनों में जब तक सर्दी बनी रहेगी, तब तक इन विदेशी गिद्धों का देगराय ओरण में प्रवास जारी रहने की संभावना है। ऐसे में जैसलमेर इन दिनों पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।


