शोभना शर्मा। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे और अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले राजेंद्र गुढ़ा गुरुवार को उस समय विवादों में आ गए, जब वे राजपूत हॉस्टल पहुंचे। उनके पहुंचते ही हॉस्टल के वार्डन द्वारा मुख्य गेट पर ताला लगाए जाने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस घटनाक्रम ने न केवल हॉस्टल परिसर में हंगामा खड़ा किया, बल्कि राजपूत समाज और राजनीतिक गलियारों में भी तीखी चर्चाओं को जन्म दे दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजेंद्र गुढ़ा के हॉस्टल पहुंचने की सूचना मिलते ही वार्डन योगेश सिंह ने मुख्य गेट बंद कर दिया। गुढ़ा ने गेट खोलने के लिए कहा, लेकिन वार्डन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला और अधिक गरमा गया। गेट न खुलने पर गुढ़ा ने लकड़ी की सीढ़ियों और दीवार के सहारे हॉस्टल की छत पर चढ़कर अंदर प्रवेश किया। बाद में वे भीतर की ओर भी सीढ़ियों के सहारे नीचे उतरे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हॉस्टल परिसर में मौजूद छात्रों और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गेट बंद करने पर फूटा गुस्सा
हॉस्टल के गेट बंद किए जाने से राजेंद्र गुढ़ा खासे नाराज नजर आए। उन्होंने वार्डन को इस फैसले के लिए खरी-खोटी सुनाई और सवाल किया कि आखिर उन्हें हॉस्टल में प्रवेश करने से क्यों रोका गया। गुढ़ा ने कहा कि वे किसी बाहरी व्यक्ति की तरह नहीं, बल्कि समाज के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व छात्र के रूप में यहां आए हैं। इसके बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जो पूरी तरह गलत है।
इस दौरान उन्होंने राजपूत सभा के अध्यक्ष रामसिंह चंदलाई को फोन कर सीधे तौर पर जवाब तलब किया। फोन पर हुई बातचीत में गुढ़ा ने गेट बंद करने के निर्णय को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। जब चंदलाई ने कहा कि हॉस्टल में किसी भी व्यक्ति के आने के लिए समिति की अनुमति आवश्यक है, तो गुढ़ा और अधिक भड़क गए। उन्होंने कहा कि ताला क्यों लगवाया गया और तीखे शब्दों में पूछा कि क्या यह हॉस्टल किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति है।
समिति के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप
हॉस्टल के अंदर प्रवेश करने के बाद राजेंद्र गुढ़ा ने परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान कई छात्र और वार्डन योगेश सिंह भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान गुढ़ा ने हॉस्टल की मौजूदा स्थिति पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं कभी इसी हॉस्टल में रह चुके हैं और सीनियर छात्र होने के नाते यहां आना-जाना उनका अधिकार है। समाज के हॉस्टल में किसी वरिष्ठ सदस्य या पूर्व छात्र को आने से रोकना न केवल अनुचित है, बल्कि समाज की परंपराओं के भी खिलाफ है।
गुढ़ा ने आरोप लगाया कि पिछले 40 से 50 वर्षों में राजपूत सभा की ओर से हॉस्टल में कोई ठोस विकास कार्य नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि आज भी हॉस्टल की फर्श, छत, पंखे और दीवारें दशकों पुरानी स्थिति में हैं। मरम्मत और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि वे हॉस्टल के जिस कमरे में रहते थे, वह कमरा आज भी 30 से 40 साल पहले जैसा ही नजर आता है।
छात्रों से वसूली और लूट के आरोप
निरीक्षण के दौरान राजेंद्र गुढ़ा ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों से शुल्क की जानकारी ली। छात्रों ने बताया कि उनसे 25 हजार रुपये लिए जाते हैं। इस पर गुढ़ा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर छात्र से इतनी बड़ी राशि वसूली जा रही है, जबकि बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति द्वारा 50 से 60 हजार रुपये वेतन पाने वाले कर्मचारी रखे गए हैं, जो कोई ठोस काम नहीं करते।
गुढ़ा ने कहा कि विकास के नाम पर छात्रों और उनके अभिभावकों से पैसे लिए जाते हैं, लेकिन पिछले 30 से 40 वर्षों में न तो कोई नया निर्माण हुआ और न ही हॉस्टल की स्थिति में कोई सुधार नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल में ज्यादातर गरीब परिवारों के छात्र रहते हैं और समिति के कुछ पदाधिकारी उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजपूत समाज और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर राजेंद्र गुढ़ा समिति पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समिति के नियमों और अनुमति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हॉस्टल प्रशासन और राजपूत सभा की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।


