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अजमेर में गेमिंग फ्रॉड: फ्री फायर के बहाने खाते से 10 लाख उड़ाए

अजमेर में गेमिंग फ्रॉड: फ्री फायर के बहाने खाते से 10 लाख उड़ाए

मनीषा शर्मा, अजमेर।  अजमेर में फ्री फायर ऑनलाइन गेमिंग के जरिए बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है। फ्री फायर गेम खेलते हुए बच्चों की अनजान व्यक्ति से दोस्ती भारी पड़ गई। आरोप है कि इसी संपर्क के जरिए ठगों ने बैंक अकाउंटेंट के मोबाइल को हैक कर खाते से 10 लाख 85 हजार रुपये उड़ा दिए। पीड़ित परिवार ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामला अजय नगर निवासी कपड़ा व्यापारी राजकुमार के परिवार से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार उनकी पत्नी सिम्मी, जो बैंक ऑफ इंडिया में अकाउंटेंट हैं, के मोबाइल पर बच्चे अक्सर फ्री फायर गेम खेलते थे। घर में 8 और 14 साल के दो बेटे हैं, जो समय-समय पर गेम खेलने के दौरान दूसरे प्लेयर्स से बातचीत भी करते थे।

इंस्टाग्राम चैट के दौरान साझा हो गई निजी जानकारी

जांच में सामने आया कि गेम खेलते-खेलते बच्चों की दोस्ती एक अनजान युवक से हो गई। बातचीत आगे बढ़कर इंस्टाग्राम तक पहुंच गई। युवक ने पहले अपनी ईमेल आईडी और पासवर्ड बच्चों के साथ साझा किया, ताकि वह खुद को भरोसेमंद दिखा सके। इसी बहाने बच्चों से मां की ईमेल आईडी और पासवर्ड भी हासिल कर लिया गया। यही लापरवाही आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बनी। संदिग्ध ने इन जानकारियों का इस्तेमाल करते हुए मोबाइल और बैंक से जुड़े सुरक्षा सिस्टम को एक्सेस कर लिया।

मोबाइल अपने आप ऑपरेट होने लगा, फिर आया बड़ा मैसेज

कपड़ा व्यापारी ने बताया कि रविवार को ऑनलाइन पेमेंट के लिए उन्होंने पत्नी का मोबाइल लिया, लेकिन उसमें से सारा डाटा और कॉन्टैक्ट्स डिलीट थे। उन्होंने परीक्षण के तौर पर पत्नी के खाते में अपने अकाउंट से एक-एक रुपये के दो-तीन ट्रांजैक्शन भी किए, मगर कोई मैसेज नहीं आया। थोड़ी देर बाद फोन खुद ही री-स्टार्ट हो गया और लगभग एक घंटे के भीतर 10 लाख 85 हजार रुपये के निकासी संदेश आने लगे। खाते में सिर्फ 2 लाख रुपये शेष रह गए। परिवार ने सोमवार को तुरंत बैंक जाकर अकाउंट बंद कराया।

बिना ओटीपी के निकले पैसे, कैसे हुआ फ्रॉड

पीड़ित का कहना है कि न कोई ओटीपी आया, न ही किसी तरह की चेतावनी। आशंका जताई जा रही है कि मेल आईडी और पासवर्ड के जरिए ठगों ने अकाउंट से जुड़ी सुरक्षा सेटिंग्स बदल दीं और नोटिफिकेशन को नियंत्रित कर लिया। साइबर थाना सीओ शमशेर खान के अनुसार, प्रारंभिक जांच में साफ है कि मामला पासवर्ड शेयरिंग और सोशल इंजीनियरिंग से जुड़ा है। तकनीकी विश्लेषण के साथ ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगाला जा रहा है।

बच्चों की छोटी गलती ने दिया बड़ा नुकसान

परिवार ने स्वीकार किया कि बच्चों ने अनजाने में मां की ईमेल जानकारी साझा कर दी थी। ठगों ने इसे आधार बनाकर बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना ली और रकम निकालनी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन गेम्स, सोशल मीडिया और चैटिंग प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को विशेष जागरूकता की जरूरत है। कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान या उद्देश्य स्पष्ट किए बिना निजी जानकारी मांगता है, तो उसे तुरंत ब्लॉक करना चाहिए।

पुलिस की अपील: पासवर्ड, ओटीपी और बैंक डिटेल कभी शेयर न करें

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल, ईमेल, बैंकिंग ऐप, ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन जैसी जानकारी किसी को भी न दें — चाहे सामने वाला दोस्त, गेमिंग पार्टनर या खुद को बैंक कर्मचारी बताने वाला ही क्यों न हो। पुलिस ने बताया कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधार पर संदिग्धों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही बैंक से भी आवश्यक विवरण मांगा गया है।

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