मनीषा शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने भर्ती परीक्षाओं के दौरान लगातार बढ़ रही अनुपस्थिति को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। आयोग ने राज्य सरकार को भेजे गए एक प्रस्ताव में सुझाव दिया है कि अब भर्ती परीक्षाओं में आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों से शुल्क वसूला जाए, लेकिन यह शुल्क केवल उन्हीं को वापस लौटाया जाए जो परीक्षा में उपस्थित हों। यह मॉडल न केवल अभ्यर्थियों की गंभीरता सुनिश्चित करेगा, बल्कि करोड़ों रुपये के अनावश्यक खर्च को भी रोकने में मददगार साबित होगा।
आयोग अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने बताया कि हाल के वर्षों में आयोग को बड़ी संख्या में आवेदन तो मिलते हैं, लेकिन परीक्षा के दिन कई उम्मीदवार उपस्थित ही नहीं होते। इससे प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर भारी बोझ पड़ता है। ऐसे में शुल्क वापसी की यह नीति उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी और पूरी प्रणाली को अधिक जिम्मेदार बनाएगी।
साल 2025 के लिए बड़ा भर्ती कैलेंडर
उत्कल रंजन साहू ने बताया कि आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को ही वर्ष 2025 का परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया था, जिसके अंतर्गत 31 विभिन्न प्रकार की भर्तियों के लिए कुल 162 प्रश्न-पत्रों की परीक्षाएं प्रस्तावित की गई हैं। साल 2025 में 13,408 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी किए गए हैं, जो 2024 में जारी 9,155 पदों की तुलना में डेढ़ गुना अधिक हैं। आवेदन संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन अनुपस्थित उम्मीदवारों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ रही है, जिसके चलते यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है।
आवेदन और इंटरव्यू प्रक्रिया में पारदर्शिता
आयोग के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष के केवल नौ महीनों में ही लगभग 27.65 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि पूरे पिछले वित्तीय वर्ष में यह संख्या 29.98 लाख थी। साक्षात्कार प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए 24 सितंबर 2025 से बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू किया गया है। इस पहल से फर्जी सहभागिता और पहचान संबंधी विवाद लगभग समाप्त हो गए हैं। चालू वर्ष में अब तक 1,859 पदों के लिए 6,382 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू आयोजित किए जा चुके हैं। वहीं, आयोग ने विभागीय पदोन्नति समितियों की 431 बैठकों के माध्यम से 24 हजार से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रमोशन भी स्वीकृत किए हैं। इससे स्पष्ट है कि आयोग केवल नई भर्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि सेवाकालीन उन्नयन प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
कैसे काम करेगी शुल्क वापसी नीति
प्रस्ताव के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों से आवेदन के समय शुल्क लिया जाएगा। लेकिन:
जो अभ्यर्थी परीक्षा में उपस्थित होंगे, उनके शुल्क को
ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) में दर्ज बैंक खाते में लौटाया जाएगा।अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों को शुल्क वापसी नहीं मिलेगी।
इससे फर्जी आवेदन, बिना तैयारी के आवेदन और ‘कॉम्पिटिशन टेस्टिंग’ के नाम पर सीट घेरने की प्रवृत्ति में कमी आएगी।
सरकार के स्तर पर अनुमोदन मिलने के बाद इसे भर्ती नियमों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आगे होने वाली परीक्षाओं में इसे लागू किया जा सके।
आयोग परिसर में नए निर्माण — बेहतर सुविधाओं की तैयारी
RPSC अपने बुनियादी ढांचे को भी मजबूत कर रहा है। दो प्रमुख निर्माण परियोजनाओं के लिए कुल 807.61 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। सीसीई ब्लॉक की तीसरी मंजिल के निर्माण पर 167.33 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे परीक्षा प्रबंधन से जुड़ा अतिरिक्त स्थान उपलब्ध होगा। इसके अलावा, साक्षात्कार प्रक्रिया को अधिक आधुनिक बनाने के लिए एक नया तीन मंजिला इंटरव्यू बोर्ड और स्टोर भवन भी बनाया जाएगा, जिस पर 640.28 लाख रुपये खर्च होंगे। ये दोनों निर्माण कार्य आगामी महीनों में शुरू होने वाले हैं। इससे उम्मीदवारों के लिए बेहतर सुविधाएं और अधिक व्यवस्थित भर्ती प्रक्रिया उपलब्ध हो सकेगी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव
भर्ती परीक्षाओं में अनुपस्थिति सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि यह अन्य गंभीर उम्मीदवारों के अवसरों पर भी असर डालती है। जब बड़ी संख्या में उम्मीदवार केवल “ट्रायल” देने के लिए आवेदन करते हैं, तो न केवल व्यवस्थागत दबाव बढ़ता है, बल्कि मेरिट-आधारित प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होती है।
आयोग का मानना है कि शुल्क वापसी नीति से:
संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा
खर्च कम होगा
उम्मीदवारों की गंभीरता बढ़ेगी
परीक्षा प्रणाली और पारदर्शी बनेगी
राज्य सरकार के स्तर पर यह प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद लागू होगा और संभव है कि यह मॉडल आगे चलकर अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बने।


