मनीषा शर्मा, अजमेर। अजमेर शरीफ दरगाह में महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स के मौके पर अकीदत और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में जायरीन ख्वाजा साहब की दरगाह पर जियारत के लिए पहुंच रहे हैं। उर्स के दौरान आम जायरीन के साथ-साथ वीआईपी चादर पेश करने का सिलसिला भी लगातार जारी है। मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश की गई। रक्षा मंत्री की ओर से यह चादर दरगाह कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष और भाजपा नेता मुनव्वर खान लेकर पहुंचे। दरगाह परिसर में पहुंचने पर खादिमों की ओर से उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
बुलंद दरवाजे पर पढ़ा गया रक्षा मंत्री का संदेश
मुनव्वर खान ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश की और बुलंद दरवाजे पर उनका संदेश भी पढ़कर सुनाया। इस दौरान देश में अमन, चैन, शांति और भाईचारा कायम रहने की दुआ की गई। उर्स के मौके पर दरगाह परिसर में सूफियाना माहौल और रूहानी फिजा देखने को मिली।
अपने संदेश में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती जी के 814वें उर्स का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए अजमेर शरीफ पहुंच रहे हैं। उन्होंने ख्वाजा साहब के उस संदेश को याद किया, जिसमें आपसी भेदभाव को भूलकर सौहार्दपूर्ण जीवन जीने की सीख दी गई है।
राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में यह भी कहा कि ख्वाजा साहब का उर्स ऐसा अवसर होता है, जहां सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग श्रद्धा भाव से शामिल होते हैं। उन्होंने 814वें उर्स के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से दरगाह पर अकीदत के फूल और चादर भेंट की।
बुधवार को भी वीआईपी चादरों का सिलसिला रहेगा जारी
814वें उर्स के दौरान बुधवार को भी दरगाह में वीआईपी चादर पेश करने का क्रम जारी रहेगा। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी दरगाह अजमेर पहुंचेंगे। वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश करेंगे।
इसके अलावा राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की ओर से भी दरगाह में चादर पेश की जाएगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी भी बुधवार को दरगाह जियारत करेंगे और 814वें उर्स के मौके पर चादर पेश करेंगे।
उर्स में दिख रहा भाईचारे और सूफी परंपरा का रंग
ख्वाजा साहब का उर्स सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। उर्स के दौरान दरगाह में हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ नजर आते हैं। जायरीन ख्वाजा साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए अमन, मोहब्बत और इंसानियत की दुआ करते हैं।
प्रशासन और दरगाह प्रबंधन की ओर से भी उर्स के सफल आयोजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा, यातायात और जायरीन की सुविधाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के जियारत कर सकें।


