राजस्थानबाड़मेर

बाड़मेर में फीस बढ़ोतरी विरोध के दौरान कलेक्टर टीना डाबी पर टिप्पणी से विवाद

बाड़मेर में फीस बढ़ोतरी विरोध के दौरान कलेक्टर टीना डाबी पर टिप्पणी से विवाद

शोभना शर्मा।  बाड़मेर में राजकीय कन्या महाविद्यालय की फीस बढ़ोतरी के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान शनिवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब जिला कलेक्टर टीना डाबी को लेकर की गई एक टिप्पणी के बाद पुलिस एबीवीपी से जुड़े छात्र नेताओं को कोतवाली थाने ले आई। इस कार्रवाई से छात्र संगठनों में आक्रोश फैल गया और मामला कुछ ही समय में तूल पकड़ गया। हालांकि, प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप तथा माफी के बाद देर रात स्थिति शांत हो सकी।

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना

राजकीय कन्या महाविद्यालय में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्राएं लंबे समय से नाराज चल रही थीं। शनिवार को कॉलेज के बाहर बड़ी संख्या में छात्राओं और छात्र संगठनों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ी हुई फीस आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल बना देगी। प्रशासन की ओर से प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर छात्राओं से बातचीत की और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना प्रदर्शन शांत हो गया।

प्रशासनिक अधिकारी की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

धरना समाप्त होने के बाद कॉलेज परिसर के पास मौजूद एबीवीपी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और छात्रों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि समझाइश के लिए पहुंचे जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बातचीत के दौरान जिला कलेक्टर टीना डाबी को रोल मॉडल बताते हुए टिप्पणी की। इस पर एबीवीपी से जुड़े छात्र नेताओं ने आपत्ति जताई और कथित तौर पर कलेक्टर को “रील स्टार” कह दिया। छात्र नेताओं का कहना था कि कलेक्टर सफाई अभियानों में रील बनाने पहुंच जाती हैं, लेकिन चार घंटे से धरने पर बैठी छात्राओं की समस्याओं को जानने नहीं आईं। इसी टिप्पणी के बाद पुलिस ने मौके से एबीवीपी के कुछ पदाधिकारियों को गाड़ी में बैठाकर कोतवाली थाने ले जाया।

थाने ले जाने से भड़का आक्रोश

एबीवीपी पदाधिकारियों को थाने ले जाने की खबर फैलते ही संगठन के कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में कोतवाली थाने पहुंच गए। थाने के बाहर और भीतर नारेबाजी शुरू हो गई। थाने लाए गए छात्र नेताओं का कहना था कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन्हें किस आरोप में वहां लाया गया है। उन्होंने पुलिस से स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उन्होंने कोई अपराध किया है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इस मांग के साथ ही थाने में माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया।

प्रशासन और पुलिस की दखल से शुरू हुई वार्ता

स्थिति को बिगड़ता देख अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत और पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीना स्वयं कोतवाली थाने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने एबीवीपी पदाधिकारियों और छात्रों से बातचीत की। थाने में कई घंटे तक वार्ता चली, जिसमें पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखीं। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जबकि छात्रों ने पुलिस की कार्रवाई को अनावश्यक और अपमानजनक बताया।

माफी के बाद शांत हुआ मामला

लंबी बातचीत के बाद पुलिस अधीक्षक की ओर से माफी मांगे जाने के बाद विवाद शांत हुआ। इसके बाद थाने लाए गए एबीवीपी पदाधिकारियों को छोड़ दिया गया। एबीवीपी विभाग संगठन मंत्री पवन ऐचरा ने कहा कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उन्हें किस कारण से थाने लाया गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई गंभीर मामला होता तो एफआईआर दर्ज की जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अंततः प्रशासन को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।

एबीवीपी नेताओं ने रखा पक्ष

प्रांत सह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्र पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। प्रशासनिक अधिकारी की टिप्पणी के जवाब में छात्रों ने अपनी बात रखी थी, जिसे गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए उनके रोल मॉडल अहिल्याबाई होल्कर और रानी लक्ष्मीबाई हैं। विजय शर्मा ने बताया कि पुलिस उन्हें, विभाग संगठन मंत्री पवन ऐचरा, विभाग संयोजक करणपाल सिंह और इकाई अध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़ को थाने ले गई थी। बाद में प्रशासन ने अपनी गलती मानी और सभी को छोड़ दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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