शोभना शर्मा। आज की जिंदगी इतनी तेज हो चुकी है कि खर्च करना बेहद आसान हो गया है। मोबाइल खोलते ही शॉपिंग ऐप्स, सोशल मीडिया विज्ञापन और लिमिटेड ऑफर सामने आ जाते हैं। एक क्लिक में पेमेंट हो जाता है और हमें यह एहसास भी नहीं होता कि कब पैसा खाते से निकल गया। यही आदत धीरे-धीरे हमारी बचत और निवेश को नुकसान पहुंचाने लगती है।
समस्या तब गंभीर हो जाती है जब छोटे-छोटे अनियोजित खर्च मिलकर महीने के अंत में बजट को बिगाड़ देते हैं। डिजिटल पेमेंट और क्रेडिट कार्ड खर्च को इतना आसान बना देते हैं कि पैसे खर्च होने का दर्द तुरंत महसूस नहीं होता, लेकिन बिल आते ही असली स्थिति सामने आ जाती है।
इंपल्स खरीदारी क्यों बन गई है बड़ा खतरा
इंपल्स खरीदारी का मतलब है बिना प्लान और जरूरत के कुछ भी खरीद लेना। अक्सर हम ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जिनका हमारी जिंदगी में कोई खास उपयोग नहीं होता। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम हमारी पसंद को पहचानकर उसी तरह के प्रोडक्ट दिखाते हैं और हमारा दिमाग तुरंत खरीदने के लिए तैयार हो जाता है। शुरुआत में यह खर्च छोटा लगता है, लेकिन लंबे समय में यह आदत हजारों-लाखों का नुकसान कर सकती है।
क्रेडिट कार्ड खर्च को कैसे बढ़ाता है
क्रेडिट कार्ड इंपल्स खर्च को और खतरनाक बना देता है। कार्ड से भुगतान करते समय ऐसा लगता है कि अभी पैसा नहीं जा रहा। कई लोग सिर्फ न्यूनतम राशि चुकाकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि बाकी रकम पर भारी ब्याज लगने लगता है। इस तरह खर्च और कर्ज दोनों एक साथ बढ़ते चले जाते हैं।
क्या है 48 Hour Rule
48 Hour Rule एक बेहद सरल लेकिन असरदार तरीका है। इसका नियम यह है कि किसी भी गैर-जरूरी चीज को खरीदने से पहले 48 घंटे यानी दो दिन रुकें। इन दो दिनों के बाद अगर आपको लगे कि वह चीज वाकई जरूरी है और आपके बजट में फिट बैठती है, तभी खरीदारी करें। अधिकतर मामलों में दो दिन बाद खरीदने की इच्छा अपने आप खत्म हो जाती है।
48 घंटे का नियम कैसे करता है मदद
इस नियम का उद्देश्य खर्च को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि समझदारी से खर्च करना है। जरूरी खर्च जैसे किराना, बिजली का बिल या पेट्रोल इस नियम में शामिल नहीं होते। लेकिन कपड़े, जूते, गैजेट्स, सब्सक्रिप्शन और अचानक ऑनलाइन शॉपिंग जरूर आती है। 48 घंटे का समय आपको यह सोचने का मौका देता है कि यह खर्च आपकी जिंदगी में सच में कोई वैल्यू जोड़ रहा है या नहीं।
इंपल्स खरीदारी अक्सर इमोशनल क्यों होती है
ज्यादातर इंपल्स खर्च भावनाओं से जुड़े होते हैं। खुशी, तनाव, बोरियत या FOMO यानी छूट जाने का डर हमें तुरंत फैसला लेने पर मजबूर करता है। सेल और लिमिटेड ऑफर जैसे शब्द दिमाग पर असर डालते हैं। 48 घंटे का इंतजार इन भावनाओं को शांत कर देता है और सोचने की क्षमता लौट आती है।
रोजमर्रा की जिंदगी में नियम कैसे अपनाएं
48 Hour Rule अपनाने का आसान तरीका है मोबाइल में एक “Buy Later” लिस्ट बनाना। इसमें लिखें कि क्या खरीदना है, उसकी कीमत क्या है और तारीख क्या है। दो दिन बाद इस लिस्ट को दोबारा देखें। कई बार आपको खुद हैरानी होगी कि वह चीज अब जरूरी नहीं लगती।
लंबे समय में क्या बदलाव आता है
इस नियम को अपनाने से धीरे-धीरे फालतू खर्च कम होने लगता है। आप जरूरी लक्ष्यों के लिए पैसा बचा पाते हैं, आपकी सेविंग बढ़ती है और निवेश मजबूत होता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसों को लेकर तनाव कम हो जाता है।


