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फर्जी डिग्री से सरकारी नौकरी: जयपुर में असिस्टेंट फायर ऑफिसर को SOG ने किया गिरफ्तार

फर्जी डिग्री से सरकारी नौकरी: जयपुर में असिस्टेंट फायर ऑफिसर को SOG ने किया गिरफ्तार

मनीषा शर्मा।  राजस्थान में फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों पर शिकंजा कसते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर में बड़ी कार्रवाई की है। एसओजी ने मालवीय नगर जोन में तैनात एक महिला असिस्टेंट फायर ऑफिसर को गुरुवार देर शाम गिरफ्तार किया। आरोप है कि महिला अधिकारी ने फर्जी और नियमों के खिलाफ हासिल की गई डिग्री व डिप्लोमा के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की थी और वह पिछले करीब तीन वर्षों से इस पद पर कार्यरत थी।

2021 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी महिला अधिकारी सोबिया सैयद को वर्ष 2021 में आयोजित फायर भर्ती परीक्षा से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान ऐसे शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए, जो नियमों के अनुसार मान्य नहीं हो सकते थे। इसके बावजूद उसने चयन बोर्ड और संबंधित विभागों को गुमराह कर असिस्टेंट फायर ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली।

एक ही शैक्षणिक सत्र में दो कॉलेजों से पढ़ाई

एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोबिया सैयद ने एक ही शैक्षणिक सत्र में दो अलग-अलग संस्थानों से रेगुलर मोड में पढ़ाई की। उसने राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कोटा से रेगुलर मोड में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की थी। इसके साथ ही महाराष्ट्र के नागपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग (NIFSE) से फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग का एक वर्षीय डिप्लोमा भी रेगुलर मोड में किया।

नियमों के अनुसार, एक ही समय में दो अलग-अलग संस्थानों से रेगुलर कोर्स करना संभव नहीं है, खासकर तब जब दोनों संस्थान अलग-अलग राज्यों में स्थित हों।

900 किलोमीटर की दूरी, फिर भी एक साथ डिप्लोमा

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने नागपुर स्थित NIFSE से लिखित परीक्षा का परिणाम आने के बाद दोबारा ‘असिस्टेंट फायर ऑफिसर’ का डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके अलावा उसी शैक्षणिक सत्र में राजस्थान के झुंझुनूं स्थित सिंघानिया यूनिवर्सिटी से भी ‘असिस्टेंट फायर ऑफिसर’ का डिप्लोमा हासिल किया गया। इन दोनों संस्थानों के बीच की दूरी करीब 900 किलोमीटर है, जिससे एक ही समय में दोनों जगह रेगुलर पढ़ाई करना व्यावहारिक रूप से असंभव माना जा रहा है।

चयन बोर्ड और विभाग को किया गुमराह

एसओजी अधिकारियों के अनुसार, सोबिया सैयद ने NIFSE नागपुर से प्राप्त डिप्लोमा को आधार बनाकर कर्मचारी चयन बोर्ड और स्वायत्त शासन विभाग को गुमराह किया। फर्जी और नियमविरुद्ध शैक्षणिक योग्यता दिखाकर उसने वर्ष 2022 में असिस्टेंट फायर ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। वर्तमान में वह जयपुर के मालवीय नगर जोन में इस पद पर तैनात थी।

तीन साल तक निभाती रही जिम्मेदारी

सबसे गंभीर पहलू यह है कि आरोपी महिला अधिकारी करीब तीन वर्षों तक संवेदनशील पद पर तैनात रही और सरकारी वेतन व सुविधाएं प्राप्त करती रही। इस दौरान उसके शैक्षणिक दस्तावेजों की वैधता पर किसी स्तर पर सवाल नहीं उठे, जिससे भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

एसओजी की गहन पूछताछ जारी

एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं रही। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किस स्तर पर लापरवाही हुई या किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही।

भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर राजस्थान में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। एसओजी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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