मनीषा शर्मा, अजमेर। अजमेर में बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब ब्रह्मपुरी इलाके में रहने वाले शहर के चर्चित सोना-चांदी आभूषण व्यापारी गिरिराज सोनी के घर पर वन विभाग, स्थानीय पुलिस और पुरातत्व विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई की। यह कार्रवाई अलवर गेट थाना प्रभारी नरेंद्र जाखड़ के नेतृत्व में की गई, जिसमें टीम को घर के भीतर से वन्यजीवों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के साथ-साथ बड़ी संख्या में संदिग्ध एंटीक वस्तुएं भी हाथ लगीं। अधिकारियों के अनुसार, छापे के दौरान दो बारहसिंगा (स्वैम्प डियर) के सींग और दो भालू के नाखून बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में ये सभी सामग्री काफी पुरानी प्रतीत हो रही है, हालांकि इनकी वास्तविकता, आयु और वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में जांच कराई जाएगी। आरोपी को Forest Act और Arms Act के तहत गिरफ्तार किया गया है।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई, इलाके में मचा हड़कंप
बुधवार (17 दिसंबर) को दोपहर के समय जब संयुक्त टीम गिरिराज सोनी के आवास पर पहुंची, तो आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। ब्रह्मपुरी क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका है और वहां एक साथ वन विभाग, पुलिस और पुरातत्व विभाग की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। टीम ने विधिवत तलाशी अभियान चलाया, जिसमें घर के अलग-अलग हिस्सों की बारीकी से जांच की गई। इस दौरान न सिर्फ वन्यजीव सामग्री बरामद हुई, बल्कि ऐसे हथियार और प्राचीन वस्तुएं भी सामने आईं, जिनकी जानकारी पहले किसी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं थी।
तलवार, चाकू और एंटीक सिक्के भी मिले
छापे के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में धारदार चाकू और एक तलवार भी मिली, जिस पर आर्म्स एक्ट के तहत सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके से 25 एंटीक सिक्के जब्त किए हैं। इन सिक्कों के बारे में प्रारंभिक अनुमान है कि ये राजा-महाराजाओं के दौर के हो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ एंटीक पेंटिंग्स भी बरामद हुई हैं, जिन्हें ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं माना जा रहा है। पुरातत्व विभाग ने इन सभी वस्तुओं को अपने कब्जे में लेकर जांच के दायरे में लिया है। साथ ही पुराने पांच, दस और बीस पैसे के सिक्के भी मिले हैं, जिनका कुल वजन लगभग पांच किलो बताया जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर मामला
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बारहसिंगा और भालू दोनों ही संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आते हैं। इनके अंगों का रखना, खरीद-फरोख्त या प्रदर्शन करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है। यदि जांच में यह साबित होता है कि ये सामग्री अवैध रूप से रखी गई थी, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि FSL रिपोर्ट के बाद यह तय होगा कि ये सींग और नाखून कितने पुराने हैं और किस अवधि के हैं। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।
फॉरेस्ट एक्ट और आर्म्स एक्ट में गिरफ्तारी
अलवर गेट थाना प्रभारी नरेंद्र जाखड़ ने बताया कि गिरिराज सोनी को फॉरेस्ट एक्ट और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ भी की है, जिसमें उसने दावा किया कि किशनगढ़ में उनकी एक पुरानी पैतृक हवेली थी। आरोपी के अनुसार, वहां से यह सारा सामान लाया गया था और नए मकान में इन्हें सजाने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी वजह से ये वस्तुएं काफी समय से उनके घर में रखी हुई थीं। हालांकि पुलिस और वन विभाग इस दावे की पुष्टि कर रहे हैं।
पुरातत्व विभाग भी करेगा विस्तृत जांच
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए एंटीक सिक्कों और पेंटिंग्स की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता की जांच की जाएगी। यदि ये वस्तुएं संरक्षित श्रेणी में आती हैं और बिना अनुमति रखी गई हैं, तो आरोपी पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। विभाग का कहना है कि राजस्थान में एंटीक वस्तुओं की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और इस तरह की कार्रवाइयां ऐसे नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए जरूरी हैं।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
फिलहाल गिरिराज सोनी से पूछताछ जारी है और सभी बरामद वस्तुओं की वैधता व प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। पुलिस, वन विभाग और पुरातत्व विभाग मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह सामग्री कब और कैसे हासिल की गई।


