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Travel Loan लेकर घूमना समझदारी या गलती

Travel Loan लेकर घूमना समझदारी या गलती

शोभना शर्मा।  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घूमना-फिरना सिर्फ एक लग्जरी नहीं रह गया है। काम का लगातार तनाव, वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी और सोशल मीडिया पर दिखती ट्रैवल स्टोरीज लोगों को ब्रेक लेने के लिए मजबूर कर रही हैं। मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी ट्रैवल को जरूरी माना जाने लगा है। लेकिन समस्या तब आती है, जब ट्रिप प्लान तो हो जाता है, पर जेब इजाजत नहीं देती। ऐसे में कई लोग Travel Loan या ट्रैवल के लिए Personal Loan का सहारा लेते हैं। सवाल यही है कि क्या यह फैसला आर्थिक रूप से सही है।

क्या होता है Travel Loan

Travel Loan असल में अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन का ही एक रूप होता है, जिसे खासतौर पर यात्रा से जुड़े खर्चों के लिए लिया जाता है। इसमें फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग, टूर पैकेज, वीजा फीस, ट्रैवल इंश्योरेंस और लोकल ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। चूंकि इसमें कोई गारंटी या सिक्योरिटी नहीं देनी होती, इसलिए इसका ब्याज दर आमतौर पर ज्यादा होता है। बैंक और NBFC इसे आसान प्रोसेस और जल्दी अप्रूवल के साथ ऑफर करते हैं, जिससे लोग बिना ज्यादा सोचे इसे ले लेते हैं।

Travel Loan लेने के फायदे

Travel Loan का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सपनों की ट्रिप को टालना नहीं पड़ता। अगर आपकी सेविंग्स कम हैं, लेकिन ट्रिप बहुत जरूरी या खास है, तो लोन से आप तुरंत प्लान पूरा कर सकते हैं। दूसरा फायदा यह है कि एकमुश्त बड़ा खर्च करने का दबाव नहीं रहता। पूरा खर्च EMI में बंट जाता है, जिससे मंथली बजट पर अचानक भारी असर नहीं पड़ता। इसके अलावा हनीमून, फैमिली वेकेशन या किसी खास पारिवारिक मौके पर जब खर्च टालना संभव न हो, तब ट्रैवल लोन एक विकल्प बन सकता है।

Travel Loan के नुकसान और जोखिम

जहां फायदे हैं, वहीं इसके नुकसान भी उतने ही बड़े हैं। Travel Loan पर ब्याज दर आमतौर पर 12 प्रतिशत से 24 प्रतिशत सालाना तक हो सकती है। इसका मतलब यह है कि आपकी ट्रिप असल खर्च से कहीं ज्यादा महंगी पड़ जाती है। ट्रिप खत्म होने के बाद भी EMI का सिलसिला महीनों तक चलता रहता है। कई बार छुट्टी की खुशी कुछ ही दिनों में खत्म हो जाती है और EMI का मानसिक दबाव शुरू हो जाता है। अगर पहले से होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया चल रहा हो, तो ट्रैवल लोन आपकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग बिगाड़ सकता है।

EMI का गणित जो फैसला बदल सकता है

मान लीजिए आपने 2 लाख रुपये का Travel Loan लिया है। ब्याज दर 18 प्रतिशत सालाना है और अवधि 24 महीने की है। ऐसे में आपकी EMI करीब 9,985 रुपये यानी लगभग 10,000 रुपये बनेगी। दो साल में आप कुल लगभग 2.40 लाख रुपये चुका देंगे। इसका मतलब है कि सिर्फ घूमने के लिए आपको करीब 40,000 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। यह गणित कई बार लोगों को एहसास कराता है कि ट्रिप की असली कीमत कितनी ज्यादा हो जाती है।

कब Travel Loan लेना सही माना जा सकता है

Travel Loan हर हाल में गलत नहीं होता। अगर आपकी इनकम स्थिर है, EMI आपकी मंथली सैलरी के 20 से 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है और आपके पास अलग से इमरजेंसी फंड मौजूद है, तो यह फैसला कंट्रोल में माना जा सकता है। इसके अलावा अगर ट्रिप बहुत खास है और किसी वजह से टाली नहीं जा सकती, तब भी ट्रैवल लोन एक सोचा-समझा विकल्प हो सकता है।

कब Travel Loan से बचना चाहिए

अगर आप सिर्फ सोशल मीडिया के दबाव या दिखावे के लिए घूमना चाहते हैं, तो लोन लेना समझदारी नहीं है। अनिश्चित नौकरी, पहले से चल रही कई EMI या सीमित इनकम की स्थिति में ट्रैवल लोन भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है। सिर्फ लग्जरी और स्टेटस के लिए लिया गया लोन लंबे समय तक आर्थिक तनाव दे सकता है।

Travel Loan के बेहतर विकल्प

सबसे बेहतर विकल्प है पहले से ट्रैवल के लिए सेविंग करना। हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा अलग ट्रैवल फंड में डालने से बिना कर्ज घूमना संभव हो जाता है। क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल भी एक विकल्प हो सकता है, बशर्ते आप ग्रेस पीरियड में पूरा भुगतान कर सकें। इसके अलावा ऑफ-सीजन में यात्रा, सस्ते होटल, ट्रेन या बजट फ्लाइट और डील्स का इस्तेमाल करके खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय क्या कहती है

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लोन का इस्तेमाल उन चीजों के लिए बेहतर होता है जो भविष्य में रिटर्न देती हैं, जैसे घर, पढ़ाई या बिजनेस। ट्रैवल एक शानदार अनुभव जरूर है, लेकिन यह आर्थिक रिटर्न नहीं देता। इसलिए ट्रैवल लोन को आखिरी विकल्प ही मानना चाहिए। सही प्लानिंग और समझदारी से लिया गया फैसला ही आपको घूमने की खुशी के साथ फाइनेंशियल सुकून भी दे सकता है।

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