मनीषा शर्मा। भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करते हुए अमेरिका से आखिरी तीन अपाचे AH-64E अटैक हेलिकॉप्टर भारत पहुंच गए हैं। ये हेलिकॉप्टर भारी परिवहन विमान एंटोनोव AN-124 के जरिए गाजियाबाद जिले के हिंडन एयरबेस पर उतरे। इसके साथ ही भारतीय सेना के लिए खरीदे गए सभी छह अपाचे हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी पूरी हो गई है। सेना की ओर से बताया गया कि जरूरी असेंबली, संयुक्त निरीक्षण और तकनीकी औपचारिकताओं के बाद इन हेलिकॉप्टरों को राजस्थान के जोधपुर में तैनात किया जाएगा। इनकी तैनाती पश्चिमी सीमा पर सेना की ऑपरेशनल ताकत को नया आयाम देगी।
जोधपुर के 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में तैनाती
इन तीनों अपाचे हेलिकॉप्टरों को जोधपुर में स्थित 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा। यह स्क्वाड्रन पाकिस्तान सीमा के बेहद नजदीक स्थित है, जहां से रेगिस्तानी इलाकों में तेजी से ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं। सेना ने स्पष्ट किया है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आने वाले दिनों में हेलिकॉप्टरों को जोधपुर भेज दिया जाएगा।
राजस्थान में तैनाती को ध्यान में रखते हुए इन अपाचे हेलिकॉप्टरों का रंग रेतीला रखा गया है, ताकि थार के रेगिस्तान जैसे इलाकों में ये आसानी से छिप सकें और दुश्मन की नजर से बचे रहें। यह कैमोफ्लाज डिजाइन इन्हें युद्ध के दौरान अतिरिक्त बढ़त देता है।
600 मिलियन डॉलर का सौदा, देरी के बाद पूरा
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2020 में अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ थल सेना के लिए छह अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर खरीदने का करार किया था। इस सौदे की कुल कीमत करीब 600 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 5,691 करोड़ रुपये थी। मूल योजना के अनुसार सभी हेलिकॉप्टर मई-जून 2024 तक भारत पहुंचने थे।
हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और कुछ तकनीकी कारणों से डिलीवरी में करीब 15 महीने की देरी हो गई। पहली खेप के तीन अपाचे हेलिकॉप्टर जुलाई 2025 में भारत पहुंचे थे। इसके बाद आखिरी तीन हेलिकॉप्टर नवंबर में भेजे जाने थे, लेकिन तुर्की द्वारा ओवरफ्लाइट की अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान को अमेरिका वापस लौटना पड़ा। अब यह अंतिम खेप भारत पहुंचने के साथ ही सौदा पूरी तरह संपन्न हो गया है।
पहले से तैयार था जोधपुर स्क्वाड्रन
भारतीय सेना ने इन हेलिकॉप्टरों की तैनाती को लेकर पहले से ही तैयारी कर रखी थी। मार्च 2024 में जोधपुर में 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से गठित किया गया था। इसके अलावा अमेरिका में आर्मी एविएशन कोर के 50 पायलटों और तकनीकी ग्राउंड स्टाफ की विशेष ट्रेनिंग भी पहले ही पूरी कर ली गई है।
इस साल भारतीय सेना के अपाचे हेलिकॉप्टरों ने एक्सरसाइज ‘मरू ज्वाला’ के दौरान अपना ऑपरेशनल डेब्यू किया था। इससे यह साफ हो गया था कि सेना इन्हें जल्द ही सक्रिय भूमिका में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। जोधपुर मिलिट्री स्टेशन के अधीन पहले से ही स्वदेशी रुद्र हेलिकॉप्टर तैनात हैं, जिससे अपाचे के शामिल होने पर एयर सपोर्ट और ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
दुनिया का सबसे घातक अटैक हेलिकॉप्टर
AH-64E अपाचे को दुनिया के सबसे एडवांस अटैक हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। इसे अक्सर “फ्लाइंग टैंक” भी कहा जाता है। यह हेलिकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, 70 मिमी रॉकेट और 30 मिमी चेन गन से लैस होता है, जो इसे जमीनी और हवाई दोनों तरह के लक्ष्यों के खिलाफ बेहद घातक बनाता है।
इसमें लगा AN/APG-78 लॉन्गबो रडार सिस्टम एक साथ 256 लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है और उनमें से 16 सबसे खतरनाक टारगेट को प्राथमिकता दे सकता है। इसके अलावा अत्याधुनिक नाइट विजन सिस्टम की मदद से यह अंधेरे में भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है और सटीक हमला कर सकता है।
पाकिस्तान सीमा पर रणनीतिक बढ़त
जोधपुर में अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती का रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है। यह क्षेत्र पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है और यहां से सेना को रेगिस्तानी इलाकों में तेजी से जवाबी कार्रवाई करने में आसानी होगी। अपाचे हेलिकॉप्टरों की मौजूदगी से भारत की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के बाद पश्चिमी सीमा पर तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती यह संदेश देती है कि भारत किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वायुसेना के पास पहले से अपाचे
भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 22 अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर मौजूद हैं, जो लद्दाख और पश्चिमी सेक्टर में तैनात हैं। वायुसेना को ये हेलिकॉप्टर भी अमेरिका से 2020 में मिले थे। हालांकि, यह पहली बार है जब भारतीय सेना को अपने स्वयं के अपाचे हेलिकॉप्टर मिले हैं।


