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जल जीवन मिशन में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर, ACB की SIT ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

जल जीवन मिशन में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर, ACB की SIT ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

शोभना शर्मा।  राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बार फिर जल जीवन मिशन में चल रही कथित गड़बड़ियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचाने की इस महत्वाकांक्षी योजना में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद ACB के विशेष जांच दल (SIT) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें ठेकेदार, फर्म मालिक, मैनेजर और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) का तत्कालीन लेखाधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों ने बुधवार को इस कार्रवाई की पुष्टि की।

ACB महानिदेशक ने दी गिरफ्तारी की जानकारी

ACB के महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि SIT ने जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के मामले में बुधवार 17 दिसंबर को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गणपति ट्यूबवेल के प्रोपराइटर महेश कुमार मित्तल, हेमन्त मित्तल उर्फ गोलू, श्याम ट्यूबवेल के उमेश कुमार शर्मा, PHED के तत्कालीन लेखाधिकारी गोपाल कुमावत और श्याम ट्यूबवेल के प्रोपराइटर पीयूष जैन शामिल हैं। सभी आरोपियों की भूमिका जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों में संदिग्ध पाई गई है।

ठेके हासिल करने में मिलीभगत का आरोप

गोविन्द गुप्ता के अनुसार, इस मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक फर्म श्याम ट्यूबवेल, इसके प्रोपराइटर पदम चंद जैन और गणपति ट्यूबवेल, इसके प्रोपराइटर महेश कुमार मित्तल ने PHED के अधिकारियों से मिलीभगत कर जल जीवन मिशन परियोजना के तहत निविदाएं हासिल की थीं। आरोप है कि अधिशाषी अभियंता माया लाल सैनी (खंड बहरोड़), सहायक अभियंता राकेश चौहान (उपखंड नीमराना) और कनिष्ठ अभियंता प्रदीप कुमार (उपखंड नीमराना) के साथ सांठगांठ कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

घटिया काम कर करोड़ों का भुगतान लेने का आरोप

ACB की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों में गंभीर अनियमितताएं कीं और घटिया गुणवत्ता का काम कराया। इसके बावजूद मनमाने तरीके से ‘मेजरमेंट बुक’ भरी गई और राजकोष से करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि काम की वास्तविक स्थिति और भुगतान के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरी हो गई है।

बातचीत के ऑडियो बने अहम सबूत

ACB ने इस मामले में तकनीकी जांच के दौरान आरोपियों की आपसी बातचीत को रिकॉर्ड किया है। इन रिकॉर्डेड बातचीत में ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के बीच मिलीभगत के स्पष्ट संकेत मिले हैं। बातचीत से यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने राजकोष से अनियमित तरीके से धनराशि प्राप्त करने और विभागीय अधिकारियों को रिश्वत देकर अनुचित निजी लाभ कमाने की योजना बनाई थी। ACB अधिकारियों के अनुसार, ये ऑडियो रिकॉर्डिंग जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल की गई हैं।

फरार आरोपियों को जयपुर से पकड़ा

ACB की SIT ने इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे पांच आरोपियों को जयपुर के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जल जीवन मिशन में यह कथित भ्रष्टाचार कितने बड़े स्तर पर फैला हुआ है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

PHED अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस पूरे मामले में PHED के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। जांच एजेंसी पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के इस तरह की अनियमितताएं संभव नहीं थीं। ऐसे में अब जांच का दायरा बढ़ाए जाने की संभावना है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

जल जीवन मिशन पर पहले से उठते रहे हैं सवाल

गौरतलब है कि जल जीवन मिशन को लेकर राजस्थान में पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। योजना के तहत समय पर काम पूरा न होने, गुणवत्ता से समझौता करने और भुगतान में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने भी इस योजना की प्रगति और खर्च को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

ACB का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए ACB ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ACB अधिकारियों का कहना है कि जल जीवन मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार आम जनता के हक पर डाका है, इसलिए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

फिलहाल ACB की SIT आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा सकता है।

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