मनीषा शर्मा। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार बड़े स्तर पर काम कर रही है। सिर्फ नीतियां और योजनाएं ही नहीं, बल्कि अब जमीन पर भी EV इकोसिस्टम तेजी से फैलता दिखाई दे रहा है। सरकार के साथ-साथ ऑटो कंपनियां, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और प्राइवेट प्लेयर्स मिलकर EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है।
संसद में पेश हुए ताजा आंकड़े
मंगलवार को लोकसभा में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतीराजू श्रीनिवास वर्मा ने इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लिखित जवाब दिया। उन्होंने बताया कि इस समय देशभर में कुल 29,151 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि ईवी चार्जिंग नेटवर्क अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और हाईवे तक भी तेजी से फैल रहा है।
AC और DC चार्जिंग स्टेशन का पूरा ब्रेकअप
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में मौजूद चार्जिंग स्टेशनों में दो तरह के चार्जर लगाए गए हैं—फास्ट चार्जर और स्लो चार्जर।
देशभर में इस समय:
8,805 फास्ट चार्जिंग स्टेशन यानी DC चार्जर काम कर रहे हैं।
20,346 स्लो चार्जिंग स्टेशन यानी AC चार्जर इंस्टॉल किए जा चुके हैं।फास्ट चार्जर आमतौर पर हाईवे, बड़े शहरों, मॉल, कमर्शियल एरिया और ट्रांजिट पॉइंट्स पर लगाए गए हैं, जहां कम समय में वाहन चार्ज करना जरूरी होता है। वहीं, स्लो चार्जर रेजिडेंशियल एरिया, ऑफिस परिसरों और पार्किंग स्पेस में लगाए जा रहे हैं, ताकि लोग आराम से लंबे समय तक वाहन चार्ज कर सकें।
PM e-Drive स्कीम से मिला बड़ा बूस्ट
ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को देशभर में फैलाने के लिए सरकार ने PM e-Drive स्कीम के तहत 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाना, नेटवर्क को मजबूत करना और आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना आसान बनाना है।
सरकार का साफ लक्ष्य है कि ईवी खरीदने वाले उपभोक्ताओं को चार्जिंग को लेकर किसी तरह की चिंता न हो। शहरों से लेकर हाईवे तक चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराकर ‘रेंज एंग्जायटी’ को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
FAME इंडिया फेज-2 का प्रभाव
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में फेम इंडिया स्कीम का दूसरा चरण भी बेहद अहम रहा। यह स्कीम पांच साल तक चली और 31 मार्च 2024 को समाप्त हुई। फेज-2 का कुल बजट 11,500 करोड़ रुपये था।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 16,176 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को समर्थन मिला और 6,862 ई-बसों को मंजूरी दी गई। खासकर ई-बसों की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक विकल्प तेजी से बढ़ा है। बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसें अब डीजल बसों का विकल्प बनती जा रही हैं।
ऑयल कंपनियों की बढ़ती भूमिका
सरकार ने संसद में यह भी बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब तक ओएमसी द्वारा 8,952 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाए जा चुके हैं।
पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होने से ईवी यूजर्स को यह भरोसा मिला है कि उन्हें हर जगह चार्जिंग सुविधा मिल सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को लेकर लोगों की झिझक भी काफी हद तक कम हुई है।
प्राइवेट सेक्टर के लिए खुले मौके
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लगाना अनलाइसेंस्ड एक्टिविटी है। इसका मतलब यह है कि कोई भी प्राइवेट कंपनी, स्टार्टअप या एंटरप्रेन्योर बिजली मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकता है।
इस फैसले से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में तेजी आई है और चार्जिंग नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। कई स्टार्टअप्स अब स्मार्ट चार्जिंग सॉल्यूशन, फास्ट चार्जिंग हब और बैटरी स्वैपिंग मॉडल पर काम कर रहे हैं।
रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग को भी समर्थन
ईवी सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। इलेक्ट्रिक मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की स्कीम को मंजूरी दी गई है। इस स्कीम के तहत देश में हर साल 6,000 मीट्रिक टन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तैयार की जाएगी। इससे ईवी सेक्टर की सप्लाई चेन मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
भारत का ईवी भविष्य क्या संकेत देता है
चार्जिंग स्टेशन, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी के बढ़ते इस्तेमाल से साफ है कि भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर लॉन्ग टर्म रणनीति पर काम कर रहा है। सरकार और प्राइवेट सेक्टर की साझेदारी आने वाले वर्षों में ईवी क्रांति को और तेज कर सकती है। यह बदलाव न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारत की ऊर्जा और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की तस्वीर भी बदल देगा।


