मनीषा शर्मा। राजस्थान के जोधपुर जिले में आयोजित ‘सांसद खेल महोत्सव-2025’ उस समय विवादों में घिर गया, जब मंच पर ही पंचायत समिति के प्रधान और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के बीच तीखी कहासुनी हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि बात गाली-गलौज तक पहुंच गई और कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह पूरा घटनाक्रम बच्चों, खिलाड़ियों और बड़ी संख्या में मौजूद आम लोगों के सामने हुआ, जिससे आयोजन की गरिमा पर सवाल खड़े हो गए।
शेरगढ़ के राजकीय खेल मैदान में हुआ घटनाक्रम
यह विवाद मंगलवार को जोधपुर जिले के शेरगढ़ स्थित राजकीय खेल मैदान में सामने आया। यहां विधानसभा स्तरीय सांसद खेल महोत्सव का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी थी। खेल महोत्सव का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना था, लेकिन मंच पर हुए इस घटनाक्रम ने पूरे आयोजन को सुर्खियों में ला दिया।
प्रधान के संबोधन के दौरान शुरू हुआ विवाद
कार्यक्रम के दौरान जब शेरगढ़ पंचायत समिति के प्रधान को मंच से संबोधित करने के लिए बुलाया गया, तभी विवाद की शुरुआत हो गई। प्रधान ने माइक संभालते ही प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें इस कार्यक्रम का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया। उन्होंने मंच से ही नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें बिना सूचना के ऐसे कार्यक्रम में बुलाना या नजरअंदाज करना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
बीडीओ के जवाब से भड़के प्रधान
प्रधान के आरोपों पर मंच पर मौजूद बीडीओ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं एक दिन पहले फोन कर कार्यक्रम की जानकारी दी थी। बीडीओ के इस जवाब के बाद प्रधान और अधिक भड़क गए। उन्होंने मंच से ही बीडीओ को हड़काते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह का कोई निमंत्रण नहीं मिला और फोन कॉल को औपचारिक सूचना नहीं माना जा सकता।
मंच पर ही अधिकारियों को टोकने लगे प्रधान
विवाद बढ़ने के दौरान जब एक अन्य अधिकारी ने प्रधान को शांत करने की कोशिश की, तो प्रधान ने उन्हें भी मंच से ही टोक दिया। उन्होंने कहा कि आप बैठिए, बाद में बात होगी, अभी हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। इस टिप्पणी के बाद मंच पर मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच असहज स्थिति बन गई।
गाली-गलौज तक पहुंचा मामला
मंच पर बहस का स्तर धीरे-धीरे और गिरता चला गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रधान ने माइक पर ही तीखे और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार कहासुनी हो गई। मंच के सामने बैठे बच्चे, खिलाड़ी और दर्शक यह पूरा दृश्य देखते रहे। खेल महोत्सव जैसे आयोजन में इस तरह की भाषा और व्यवहार पर लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की।
प्रोटोकॉल और निमंत्रण बना विवाद की जड़
बताया जा रहा है कि पूरा विवाद प्रोटोकॉल और निमंत्रण को लेकर हुआ। प्रधान का कहना था कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें लिखित या औपचारिक निमंत्रण दिया जाना चाहिए था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष था कि फोन के माध्यम से सूचना दे दी गई थी और जानबूझकर किसी को नजरअंदाज नहीं किया गया।
अफसरों की समझाइश के बाद शांत हुआ माहौल
विवाद के बढ़ने पर मंच पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों और आयोजकों ने हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों को अलग-अलग समझाया गया और मामला शांत कराया गया। इसके बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया, लेकिन तब तक आयोजन की गरिमा को नुकसान पहुंच चुका था। दर्शकों और खिलाड़ियों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा होती रही।
बच्चों और खिलाड़ियों पर पड़ा गलत असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद खेल महोत्सव जैसे कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और बच्चों को सकारात्मक माहौल देना होता है। मंच पर हुए इस विवाद ने न सिर्फ आयोजन की छवि खराब की, बल्कि बच्चों पर भी गलत प्रभाव डाला। कई अभिभावकों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को सार्वजनिक मंच पर संयम बरतना चाहिए।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक अव्यवस्था और अहंकार का टकराव बताया, वहीं कुछ लोगों ने इसे प्रोटोकॉल को लेकर उपजी गलतफहमी करार दिया। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई लिखित बयान सामने नहीं आया है।
आयोजन की गरिमा पर उठे सवाल
सांसद खेल महोत्सव-2025 जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में मंच पर हुआ यह विवाद कई सवाल छोड़ गया है। सार्वजनिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद का स्तर कैसा होना चाहिए, इस पर भी बहस छिड़ गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए प्रोटोकॉल और समन्वय को और बेहतर बनाया जाना चाहिए, ताकि खेल और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम विवादों की बजाय सकारात्मक संदेश दे सकें।


