शोभना शर्मा। राजस्थान विधानसभा में आयोजित यूथ पार्लियामेंट के उद्घाटन समारोह में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं के करियर, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि मजबूत बनने के लिए शरीर से ज्यादा मजबूत मन होना जरूरी है। बच्चों और युवाओं को अपने करियर का चुनाव समाज के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
“डॉक्टर–इंजीनियर ही खुदा नहीं होते”
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डॉक्टर और इंजीनियर ही सबसे बड़े करियर विकल्प नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज में यह धारणा बना दी गई है कि इन्हीं दो क्षेत्रों में सफलता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हर क्षेत्र की अपनी अहमियत है। सभी पेशे बराबर हैं और हर व्यक्ति को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे बिना अपनी रुचि समझे कोचिंग संस्थानों में चले जाते हैं और वहां अनावश्यक दबाव में आ जाते हैं। इस दबाव से बाहर निकलना जरूरी है, क्योंकि तनाव में लिया गया निर्णय भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
करियर काउंसलिंग को बताया बेहद जरूरी
वासुदेव देवनानी ने कहा कि करियर चुनने से पहले विभिन्न क्षेत्रों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। बच्चों की रुचि और योग्यता को पहचानकर उन्हें सही दिशा देना बेहद जरूरी है। इसके लिए करियर काउंसलिंग की भूमिका को उन्होंने अहम बताया।
उन्होंने कहा कि अगर युवा अपनी क्षमता और रुचि के आधार पर करियर का चयन करेंगे तो न केवल वे स्वयं सफल होंगे, बल्कि देश को भी इसका लाभ मिलेगा। मानसिक रूप से संतुलित और संतुष्ट युवा ही राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकते हैं।
छात्रा ने उठाया शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यूथ पार्लियामेंट में भाग ले रही छात्रा फाल्गुनी यादव ने शिक्षा व्यवस्था और कोचिंग कल्चर पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आज के किशोर और युवा महाभारत के अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। वे तनाव और डिप्रेशन से घिरे हैं और इसी वजह से अपने भविष्य को लेकर सही निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ के लिए करियर काउंसलिंग की सख्त जरूरत है, जो उन्हें सही राह दिखा सके। फाल्गुनी ने कहा कि मौजूदा एजुकेशन सिस्टम छात्रों का मानसिक रूप से नुकसान कर रहा है।
कोचिंग और सुसाइड पर गंभीर टिप्पणी
छात्रा ने कोचिंग संस्थानों और बढ़ती आत्महत्याओं के मुद्दे पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोचिंग स्टूडेंट्स की आत्महत्याओं की संख्या गिनी जाए तो वह कोचिंग सेंटर्स की फीस से मेल खा जाएगी। बच्चों के भीतर अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की आग जला दी गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि समस्या यह नहीं है कि आग किसने जलाई, बल्कि असली सवाल यह है कि सिस्टम के हाथ में तीली किसने दी। यह टिप्पणी पूरे सदन में गूंजती रही।
मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत
फाल्गुनी यादव ने कहा कि हम बच्चों की मौतों को तो सह लेते हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई स्वीकार करने से कतराते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर चार घंटे की पढ़ाई जरूरी है, तो मेंटल हेल्थ पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता।
उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह बड़ी कंपनियां ट्रायल पैक देती हैं, उसी तरह करियर चुनने से पहले छात्रों को भी अलग-अलग क्षेत्रों को आजमाने का अवसर मिलना चाहिए।
कोचिंग स्टूडेंट्स के तनाव पर चर्चा
यूथ पार्लियामेंट के दौरान कोचिंग स्टूडेंट्स के बीच बढ़ते तनाव और आत्महत्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने कहा कि पढ़ाई का दबाव, अभिभावकों की अपेक्षाएं और सामाजिक प्रतिस्पर्धा छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर बना रही हैं। कार्यक्रम में यह संदेश उभरकर सामने आया कि करियर की सफलता से पहले मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा जरूरी है।


