शोभना शर्मा। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक सामाजिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति या समाज का वास्तविक उद्देश्य केवल पद और उपाधियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका मूल आधार निस्वार्थ सेवा, संगठन और सकारात्मक चिंतन होना चाहिए। डॉ. तोगड़िया के अनुसार, हिंदू राष्ट्र की सच्ची पहचान तब बनेगी जब एक हिंदू दूसरे हिंदू की निस्वार्थ सहायता करेगा और समाज के हर स्तर पर सहयोग की भावना विकसित होगी।
डॉ. तोगड़िया ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक ‘हिंदू हृदय सम्राट’ जैसी उपाधियां गिने-चुने लोगों तक सीमित थीं, लेकिन आज यदि हर गली और हर मोहल्ले में कोई व्यक्ति हिंदुत्व के लिए सक्रिय दिखाई देता है, तो इसे नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पहले राजस्थान में पानी की भारी समस्या थी और आज अधिकांश घरों तक पानी पहुंच रहा है, उसी तरह यदि समाज में हर मोहल्ले में कोई हिंदुत्व के लिए खड़ा है, तो यह समाज की मजबूती का संकेत है।
हर मोहल्ले में हनुमान चालीसा पाठ का संकल्प
डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने यह स्पष्ट किया कि केवल उपाधियां धारण कर लेना पर्याप्त नहीं है। सनातन और हिंदू धर्म के नाम पर पद लेने वालों को धरातल पर सेवा कार्य करना होगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने यह संकल्प दिलाया कि हर गांव और हर मोहल्ले में शनि या मंगलवार की शाम को सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल धार्मिक चेतना मजबूत होगी, बल्कि समाज में एकता, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का भी विकास होगा।
परिवार और समाज के लिए 30 सूत्र
अपने संबोधन में डॉ. तोगड़िया ने परिवार और समाज को सशक्त बनाने के लिए 30 महत्वपूर्ण सूत्र भी बताए। उन्होंने कहा कि यदि इन सूत्रों का ईमानदारी से पालन किया जाए, तो परिवार रोगमुक्त, चिंतामुक्त रहेगा और उसे धन, यश, आरोग्य एवं सुरक्षा की प्राप्ति होगी। उनके अनुसार, ये सूत्र केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी जुड़े हुए हैं, जो व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक होते हैं।
इजराइल से भी मजबूत संगठन का लक्ष्य
डॉ. तोगड़िया ने कहा कि उद्देश्य ऐसा संगठित हिंदू समाज खड़ा करना है, जो संख्या से नहीं बल्कि संगठन, अनुशासन और संकल्प से मजबूत हो। उन्होंने इजराइल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वहां सीमित जनसंख्या के बावजूद मजबूत संगठनात्मक शक्ति खड़ी की गई है, उसी से भी अधिक सशक्त और अनुशासित संगठन भारत में खड़ा किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद, राष्ट्रीय बजरंग दल, राष्ट्रीय महिला परिषद और ओजस्विनी जैसे संगठन इसी लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
धर्मांतरण कानून और सरकार की भूमिका
धर्मांतरण के मुद्दे पर डॉ. तोगड़िया ने कहा कि सेवा ही सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने राजस्थान में लागू धर्मांतरण कानून को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे जबरन या प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही उन्होंने राजस्थान सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बधाई दी और कहा कि निरंतर सेवा और समाज को जोड़ने का कार्य ही सनातन की वास्तविक शक्ति है।
जयपुर में पारिवारिक मुलाकात
राजस्थान प्रवास के दौरान डॉ. प्रवीण तोगड़िया जयपुर के गोल्यावास क्षेत्र में महेंद्र सक्सेना के निवास पर भी पहुंचे। वहां उन्होंने उनके पिता देवेंद्र कुमार सक्सेना की कुशलक्षेम पूछी और परिवारजनों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों के महत्व पर भी जोर दिया।


