शोभना शर्मा। राजस्थान के बालोतरा जिले के सोहड़ा गांव निवासी रमेश मेघवाल का सपना था कि वह विदेश जाकर मेहनत करे और अपनी आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाए। इसी उद्देश्य से अक्टूबर महीने में वह एक स्थानीय एजेंट की मदद से कतर के वीजा पर विदेश गया था। परिवार के अनुसार, कतर पहुंचने के बाद उसे सऊदी अरब भेज दिया गया, जहां उसे ऊंटों की देखभाल का काम सौंपा गया।
हालांकि विदेश जाने के महज एक महीने बाद ही परिवार को रमेश की मौत की सूचना मिली, जिसने पूरे गांव और परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
पढ़ा-लिखा और होनहार था रमेश
परिवार वालों का कहना है कि रमेश पढ़ा-लिखा और जिम्मेदार युवक था। उसने बीएसटीसी किया हुआ था और शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसने अस्थायी रूप से विदेश जाकर काम करने का फैसला किया था। परिवार को उम्मीद थी कि रमेश लौटकर अपने भविष्य को संवार लेगा, लेकिन उसकी मौत की खबर ने सब कुछ खत्म कर दिया।
शव के इंतजार में टूटता परिवार
13 नवंबर को रमेश की मौत होने की जानकारी दी गई, लेकिन इसके बाद से शव को भारत लाने की प्रक्रिया अटकी हुई है। एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद शव नहीं पहुंचा है। रमेश की मां तीजो देवी का कहना है कि हर दिन बेटे के शव के आने की उम्मीद में आंखें रास्ता देखती हैं। परिवार गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
रमेश का एक भाई कतर में काम करता था, जो इस घटना के बाद सदमे में भारत लौट आया। पूरे घर में शोक का माहौल है और परिवार अंतिम संस्कार के लिए बेटे की प्रतीक्षा कर रहा है।
आत्महत्या के दावे पर परिवार को संदेह
परिवार आत्महत्या के दावे को मानने को तैयार नहीं है। मां तीजो देवी का कहना है कि रमेश मानसिक रूप से मजबूत था और कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि रमेश ने आखिरी बातचीत में बताया था कि वहां के मालिक और केयरटेकर उसके साथ मारपीट करते थे। वह जल्द भारत लौटना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही मौत की खबर आ गई।
इसी कारण परिवार ने मौत को संदिग्ध बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
शव लाने में हो रही देरी और सरकारी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से परेशान होकर मां तीजो देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में बताया गया कि रमेश वैध वीजा पर काम कर रहा था और इसके बावजूद विदेश मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
परिवार की ओर से कहा गया कि 26 नवंबर तक विदेश मंत्रालय ने केवल यह बताया कि मौत के कारणों की जांच चल रही है, इसके बाद कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नुपुर भाटी की सिंगल बेंच ने गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि शव लाने में इतनी देरी मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को नोटिस जारी कर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए।
केंद्र सरकार का पक्ष और अगली सुनवाई
केंद्र सरकार की ओर से एएसजी भारत व्यास ने कोर्ट में नोटिस स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि 10 दिसंबर को रियाद स्थित भारतीय दूतावास से ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसमें रमेश की मौत को कथित आत्महत्या बताया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी पुलिस मामले की जांच कर रही है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 17 दिसंबर को तय की है।


