मनीषा शर्मा। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। अब हाईकोर्ट महीने में दो शनिवार भी खुला रहेगा। इस फैसले से सालभर में हाईकोर्ट को 24 अतिरिक्त कार्यदिवस मिलेंगे, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह निर्णय जैसलमेर में आयोजित फुल कोर्ट मीटिंग के दौरान लिया गया, जिसे न्यायिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया निर्णय
यह महत्वपूर्ण फैसला जैसलमेर में आयोजित फुल कोर्ट मीटिंग में हुआ, जो वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस से पहले बुलाई गई थी। बैठक में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा सहित सभी न्यायाधीश मौजूद रहे। चर्चा के दौरान कोर्ट में लगातार बढ़ते मामलों के बोझ और उनके शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता पर विस्तार से विचार किया गया। इसी के मद्देनजर न्यायिक समय बढ़ाने को लेकर सभी जजों की सहमति बनी।
लंबित मामलों के निस्तारण पर फोकस
राजस्थान हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, जिससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में समय लग रहा है। शनिवार को भी अदालत खुलने से न केवल सुनवाई के लिए अधिक समय मिलेगा, बल्कि केस डिस्पोजल की रफ्तार भी बढ़ेगी। न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त कार्यदिवस मिलने से पुराने मामलों का निस्तारण तेजी से किया जा सकेगा और न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा।
आम जनता को मिलेगा समय पर न्याय
हाईकोर्ट के इस फैसले को आम लोगों के हित में उठाया गया कदम माना जा रहा है। शनिवार को अदालत खुलने से वकीलों और पक्षकारों को मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। इससे तारीखों की संख्या घटेगी और न्याय प्रक्रिया अधिक सुचारु होगी। लंबे समय से लंबित मामलों से जूझ रहे पक्षकारों के लिए यह निर्णय राहत भरा साबित हो सकता है।
ई-कोर्ट और डिजिटल सिस्टम पर भी जोर
फुल कोर्ट मीटिंग में केवल कार्यदिवस बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि न्यायिक सुधारों के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। न्यायिक कार्यों में तकनीक के अधिक उपयोग से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मामलों की सुनवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया भी तेज होगी।
जैसलमेर में वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस
इसी बीच जैसलमेर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है। इस सम्मेलन का मुख्य विषय “Advance Rule of Law Through Technology – Challenges and Opportunities” रखा गया है। इसमें न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग, डिजिटल कोर्ट सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रक्रियाओं और आधुनिक न्यायिक सुधारों पर मंथन किया जा रहा है।
CJI की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय सम्मेलन
इस सम्मेलन की अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत कर रहे हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 20 न्यायाधीशों के साथ-साथ राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र हाईकोर्ट के जज भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा 100 से अधिक जिला एवं सत्र न्यायाधीश सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इस मंच पर न्यायिक सुधारों और तकनीकी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हो रही है।


