मनीषा शर्मा। राजस्थान के अजमेर में शुक्रवार, 12 दिसंबर की सुबह उद्योग जगत में उस समय हलचल मच गई जब स्टेट जीएसटी विभाग की टीम ने माखुपुरा उद्योग क्षेत्र स्थित सागर स्टील (JSW न्यू स्टील) पर बड़ी कार्रवाई शुरू की। यह कारखाना लोहे की चादरें, सरिया और अन्य स्टील उत्पादों की खरीद-फरोख्त में प्रमुख माना जाता है। अचानक हुई इस छापेमारी ने औद्योगिक यूनिटों और व्यापारियों में हड़कंप मचा दिया।
कार्रवाई शुरू होते ही टीम ने मुख्य कार्यालय, स्टोरेज यूनिट, बिलिंग सेक्शन और अन्य महत्वपूर्ण विभागों को अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद अधिकारी दस्तावेजों की छानबीन में जुट गए। औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि पहली बार इतनी बड़ी और समन्वित रेड देखने को मिल रही है।
कम कैश डिपॉजिट और टर्नओवर में गिरावट से विभाग हुआ अलर्ट
स्टेट जीएसटी विभाग के एडिशनल कमिश्नर जयप्रकाश मीणा के अनुसार, कई फर्मों का टर्नओवर अचानक कम होने और लगातार गिरते कैश डिपॉजिट ने विभाग का ध्यान आकर्षित किया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि कुछ फर्में फर्जी कंपनियों से बड़ी मात्रा में स्टील उत्पाद खरीद रही थीं। इससे जीएसटी की वास्तविक देय राशि सरकार तक नहीं पहुंच रही थी।
विभाग को जब मुख्यालय से विस्तृत सूचना मिली, तब अजमेर, किशनगढ़, ब्यावर, नागौर और मकराना में एक साथ एक्शन प्लान तैयार कर छापेमारी शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि इंटर-स्टेट और इंटर-फर्म लेनदेन में भी गड़बड़ियों के संकेत मिले थे, जिसने इस कार्रवाई का आधार तैयार किया।
फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी की आशंका
जांच में ऐसा सामने आया कि बिलिंग रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर हो सकता है। विभाग का संदेह है कि कई फर्में ई-वे बिल का गलत उपयोग कर रही हैं या फर्जी फर्मों से खरीद दिखाकर टैक्स चोरी कर रही हैं।
माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर रॉ मैटेरियल की खरीद दिखाकर रिवर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया है, जबकि वास्तविक बिक्री और खरीद का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा।
स्टेट जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, यदि फर्जी बिलिंग या रेवेन्यू घोटाले की पुष्टि होती है तो यह अजमेर की अब तक की सबसे बड़ी जीएसटी कार्रवाई साबित हो सकती है।
बिल, ई-वे बिल और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच जारी
टीम द्वारा कारखाने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। इनमें स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, ई-वे बिल, पर्चेज और सेल बिल तथा डिजिटल डेटा शामिल है।
अधिकारियों ने कारखाने के कर्मचारियों और बिलिंग स्टाफ से पूछताछ भी शुरू कर दी है, ताकि बिलिंग प्रोसेस, सप्लाई चेन और पेमेंट मोड की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
दस्तावेजों की तुलना, बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच और डिजिटल फाइलों की फोरेंसिक जांच के बाद विभाग यह तय करेगा कि टैक्स चोरी की कुल राशि कितनी हो सकती है और किन-किन फर्मों की इसमें भूमिका है।
औद्योगिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
माखुपुरा उद्योग क्षेत्र में यह छापेमारी बड़े पैमाने पर होने के कारण व्यापारियों और उद्यमियों में चिंता का माहौल देखा जा रहा है। कई कारोबारियों का कहना है कि विभाग की इस तरह की कार्रवाई से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन इससे उन इकाइयों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो कागजों और डिजिटल लेनदेन में गड़बड़ी कर रही थीं।
जीएसटी विभाग का कहना है कि शाम 5 बजे तक प्राथमिक रिपोर्ट सामने आ सकती है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


