मनीषा शर्मा। राजस्थान में 15 दिसंबर को भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार अपना दूसरा वर्ष पूरा करने जा रही है। इस मौके पर राज्य सरकार अपनी उपलब्धियों, फ्लैगशिप योजनाओं और बजट घोषणाओं को आम जनता तक पहुंचाने के लिए 200 विधानसभा क्षेत्रों में विकास रथ भेज रही है। दो वर्षों के कार्यकाल में सरकार ने युवाओं को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई और कई फैसले ऐसे लिए, जिनका सीधा प्रभाव प्रदेश के लाखों युवाओं, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और बेरोजगार वर्ग पर पड़ा।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसरों को और मजबूत किया जाएगा। पिछले दो वर्षों में युवाओं के लिए लिए गए सरकार के 8 बड़े फैसले इन्हीं प्रयासों का परिणाम हैं, जिन्होंने राज्य में युवा नीति को नई दिशा देने का काम किया।
1. पेपर लीक पर कड़ी रोक: परीक्षा प्रणाली को नई मजबूती
राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने की समस्या के बीच सरकार ने कड़े कदम उठाए। एसआईटी गठन के बाद से अब तक 296 परीक्षाएं आयोजित हुईं और महत्वपूर्ण बात यह रही कि इनमें एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। यह पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
एसओजी ने पेपर लीक गिरोहों पर कार्रवाई करते हुए कुल 138 एफआईआर दर्ज कीं और 394 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें एसआई भर्ती परीक्षा में 132 आरोपी शामिल थे, जिनमें 61 ट्रेनी और 6 चयनित उप निरीक्षक भी थे। इस सख्त कार्रवाई से परीक्षा प्रणाली में युवाओं का भरोसा बढ़ा है।
2. मुख्यमंत्री युवा संबल योजना: बेरोजगार युवाओं को मजबूत सहारा
भजनलाल सरकार ने मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत 2.16 लाख नई स्वीकृतियां जारी कीं। इस योजना से अब तक 4 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं को 1,155 करोड़ रूपए से ज्यादा की आर्थिक सहायता मिल चुकी है।
योजना का उद्देश्य बेरोजगार ग्रेजुएट युवाओं को आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ उन्हें कौशल विकास से जोड़ना है।
पुरुष अभ्यर्थियों को 4,000 रुपये प्रतिमाह और महिला अभ्यर्थियों को 4,500 रुपये प्रतिमाह राशि दी जाती है, जिससे वे कोचिंग, तैयारी या अन्य आवश्यक जरूरतें पूरी कर सकते हैं।
3. सरकारी नौकरी में ऐतिहासिक नियुक्तियां
दो वर्षों में भजनलाल सरकार ने 92 हजार पदों पर नियुक्तियां देकर रिकॉर्ड बनाया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरी का मौका मिला। इसके अलावा विभिन्न विभागों में 1.53 लाख पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं।
सरकार ने कहा है कि आने वाले समय में और भर्तियां तेज़ी से शुरू की जाएंगी ताकि राज्य में बेरोजगारी दर घट सके।
4. विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना: युवाओं को उद्यमिता की ओर
युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना लागू की। इस योजना के तहत युवाओं को 2 करोड़ रुपये तक का ऋण और 5 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
18 से 45 वर्ष तक के राजस्थान निवासी इसका लाभ ले सकते हैं।
योजना का उद्देश्य उन युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहयोग देना है, जो रोजगार के बजाय स्वयं उद्यमी बनना चाहते हैं।
5. रोजगार के नए अवसर: 400 से अधिक रोजगार शिविर
निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्यभर में रोजगार सहायता शिविर और करियर काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए गए। सरकार अब तक 400 से अधिक रोजगार शिविर आयोजित कर चुकी है, जिनके माध्यम से 1 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है।
इन शिविरों में कंपनियां सीधे युवाओं की भर्ती करती हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रहती है।
6. खेल प्रोत्साहन राशि: खिलाड़ियों को नया भरोसा
राजस्थान में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले दो वर्षों में 1,700 से अधिक खिलाड़ियों को 39 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की। यह राशि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दी जाती है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से खेल क्षेत्र में प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और मजबूत होगा।
7. मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना: निःशुल्क कोचिंग से नई दिशा
मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के तहत अभ्यर्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जाती है। सरकार अब तक 31 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ दे चुकी है और 213 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की है।
यह योजना विशेषकर गरीब और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है, जो अब महंगी कोचिंग के खर्च के बिना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पा रहे हैं।
8. कौशल विकास व प्रशिक्षण: उद्योग-प्रासंगिक स्किल ट्रेनिंग
राज्य के युवाओं को नौकरी के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है। अब तक 3 लाख से अधिक युवाओं को 663 कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
इसके साथ ही 683 करोड़ रुपये से अधिक का कौशल भत्ता भी वितरित किया गया है। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण से युवाओं की रोजगार क्षमता में बड़ी वृद्धि हुई है।


