मनीषा शर्मा । राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में पिछले कुछ महीनों से बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। विभाग ने हालिया अनियमितताओं के आधार पर न केवल दर्जनों पुराने अस्पतालों और फार्मेसियों को पैनल से बाहर किया है, बल्कि नए अस्पतालों के पंजीकरण को भी लगभग रोक दिया है। इसका सीधा असर राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों पर पड़ रहा है, जो इलाज के लिए इस योजना पर निर्भर हैं।
अनियमितताओं के बाद कार्रवाई, नए पंजीकरण अटके
आरजीएचएस विभाग के अनुसार, योजना में पिछले कुछ महीनों में कथित फर्जी बिलिंग, मनमाने शुल्क, गलत कोडिंग और बिल प्रोसेसिंग में अनियमितताओं की कई शिकायतें सामने आईं। इन मामलों की जांच शुरू होने के बाद विभाग ने कई अस्पतालों को नोटिस जारी किए। जांच में दोषी पाए जाने पर कई अस्पतालों और फार्मेसियों को योजना से बाहर कर दिया गया।
इतनी सख्त कार्रवाई के बाद अब विभाग ने नए अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया लगभग रोक दी है। कई निजी अस्पताल महीनों से अनुमोदन सूची में फंसे हुए हैं, लेकिन गाइडलाइनों में बदलाव का हवाला देकर इन फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
इलाज की दूरी और खर्च दोनों बढ़े
पंजीकरण प्रक्रिया रुकने का सबसे ज्यादा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है जो अपने शहर या नजदीक के क्षेत्र में इलाज के लिए पैनल अस्पतालों पर निर्भर रहते थे। कई जिलों में विकल्प सीमित होने से कर्मचारियों और पेंशनर्स को अब दूर स्थित अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों में पहले से ही सरकारी अस्पतालों का लोड काफी अधिक है। ऐसे में निजी पैनल अस्पतालों की संख्या घटने से उपचार की दूरी और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।
अधिकारियों का तर्क और अस्पतालों की नाराजगी
आरजीएचएस अधिकारियों का कहना है कि नियमों में सुधार और गंभीर अनियमितताओं की जांच पूरी होने तक नई एंट्री रोकना आवश्यक हो गया था। उनका दावा है कि योजना को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
दूसरी ओर, निजी अस्पताल संचालक आरोप लगाते हैं कि विभाग ने अनियमितताओं की आड़ में पूरी पंजीकरण प्रक्रिया को ठप कर दिया है। कई अस्पताल जो सभी मानकों पर खरे उतरते हैं, वे भी महीनों से मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
तीन महीनों में 450 से अधिक संस्थान बाहर
पिछले तीन महीनों में सरकार ने 34 अस्पतालों, 430 से अधिक फार्मेसियों और कुल मिलाकर 450 से ज्यादा संस्थानों को योजना से बाहर किया है। इससे आरजीएचएस के अंतर्गत इलाज कराने वालों के विकल्प काफी सीमित हो गए हैं। बड़े पैमाने पर संस्थान बाहर किए जाने के बावजूद नए अस्पतालों को योजना में जोड़ने की अनुमति सीमित कर दी गई है, जिससे कई सक्षम और योग्य अस्पताल भी पैनल में शामिल नहीं हो पा रहे।
आरजीएचएस से जुड़े कार्मिकों और मरीजों का कहना है कि जब तक नई गाइडलाइनों के तहत पंजीकरण प्रक्रिया सुचारू नहीं होगी, तब तक इलाज में परेशानी बढ़ती ही जाएगी।


