मनीषा शर्मा। बाड़मेर जिले में किसानों का आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ता दिख रहा है। गुड़ामालानी क्षेत्र के किसानों ने अपनी लम्बित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर रविवार को बड़े स्तर पर ट्रैक्टर रैली निकालकर जिला मुख्यालय बाड़मेर के लिए कूच कर दिया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे कलक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
किसानों की मुख्य मांगों में फसल मुआवजा, लगातार बनी बिजली समस्या, जंगली जानवरों द्वारा फसलों के नुकसान से सुरक्षा और फसल बीमा से जुड़ी पारदर्शिता शामिल हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें बीमा कंपनियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है और कई बार उन्हें गुमराह भी किया जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
तहसील कार्यालय से शुरू हुई रैली
रैली की शुरुआत गुड़ामालानी के अहिंसा सर्किल स्थित तहसील कार्यालय से हुई, जहां बड़ी संख्या में किसान अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ एकत्र हुए। किसानों ने बताया कि उन्होंने 5 दिसंबर को एसडीएम को मांग-पत्र सौंपा था, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई थी, लेकिन समस्याओं का समाधान होते नहीं दिखा। इसलिए अब उन्हें बड़ा आंदोलन करना पड़ रहा है।
किसानों ने पहले ही प्रशासन को 9 दिसंबर तक की समय सीमा दी थी और चेताया था कि यदि तब तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पहुंचकर कलक्ट्रेट का घेराव करेंगे। समय सीमा के समाप्त होते ही किसानों ने बाड़मेर की ओर ट्रैक्टरों का लंबा काफिला रवाना कर दिया।
रास्ते में तीन बार रोकने की कोशिश, सहमति नहीं बनी
प्रशासन ने गुड़ामालानी से बाड़मेर के बीच कई स्थानों पर रैली को रोकने की कोशिश की। निंबड़ी फांटा पर एसडीएम केशव कुमार, डिप्टी सुखराम विश्नोई और पुलिस टीम ने किसानों को समझाने का प्रयास किया और वार्ता भी हुई। लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग रहे और किसी भी प्रकार की आंशिक सहमति से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
इसके बाद विश्नोई की ढाणी के पास भी प्रशासन ने किसानों से मुलाकात कर बातचीत की। बावजूद इसके कोई समाधान नहीं निकल पाया और रैली आगे बढ़ती रही। आंदोलन में आरएलपी नेता ताजाराम सहित कई ग्रामीण भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो किसानों के समर्थन में पूरे मार्ग में साथ रहे।
बातचीत जारी, किसान अडिग
फिलहाल गुड़ामालानी एसडीएम और किसान नेताओं के बीच बातचीत का दौर जारी है। किसान नेता स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक फसल मुआवजा, बीमा और बिजली से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।


