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सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को राहत, जमानत जारी; पीड़िता की अपील खारिज

सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को राहत, जमानत जारी; पीड़िता की अपील खारिज

मनीषा शर्मा। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़िता द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम मेडिकल जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगी, इसलिए आसाराम की जमानत पर रिहाई जारी रहेगी।

पीड़िता ने लगाई थी सुप्रीम कोर्ट से गुहार

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि आसाराम के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और हाईकोर्ट ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन पर भी ध्यान नहीं दिया। दलील में यह भी कहा गया कि आसाराम सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हुए, जबकि उन्हें मेडिकल आधार पर राहत दी गई थी।

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आसाराम ऐसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति में नहीं हैं, जिसके आधार पर उन्हें इतनी बड़ी राहत मिलनी चाहिए। इसलिए मेडिकल आधार पर दी गई जमानत को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

राजस्थान सरकार ने भी उठाई आपत्ति

पीड़िता की अपील का समर्थन राजस्थान सरकार ने भी किया। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित एएजी शिव मंगल शर्मा और अधिवक्ता सोनाली गौर ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि आसाराम ने जमानत की विभिन्न शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने अपील लंबित रहने और जमानत की शर्तों के पालन न होने का मुद्दा रखा।

इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह हाईकोर्ट के आदेश में कोई परिवर्तन नहीं करेगा और जमानत जारी रहेगी।

आसाराम की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए मिली थी राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में आसाराम को उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए राहत दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 86 वर्षीय आसाराम की मेडिकल स्थिति सामान्य नहीं है तथा उचित इलाज की आवश्यकता है। इसलिए, अंतिम निर्णय तक उनकी सजा को अस्थायी रूप से निलंबित कर मेडिकल जमानत दी गई थी।

शर्तों के अनुसार, आसाराम को भारत छोड़ने की अनुमति नहीं है, उन्हें हर छह महीने में अपनी मेडिकल रिपोर्ट पेश करनी होगी और उपचार पूरा होने के छह महीने बाद संबंधित प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

सात साल से लंबित है आसाराम की अपील

आसाराम को 15 अप्रैल 2018 को जोधपुर की एक पॉक्सो अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आसाराम ने उसी वर्ष राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यह अपील लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस अपील पर शीघ्र सुनवाई करके तीन महीने के भीतर इसका निपटारा करे। अदालत ने कहा कि इतने वर्षों से लंबित गंभीर आपराधिक मामले को अब और टालना उचित नहीं है।

जमानत पर रिहाई जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब आसाराम की जमानत जारी रहेगी और उन्हें मेडिकल आधार पर दी गई छूट बनी रहेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और शर्तों का पालन अनिवार्य है, और संबंधित एजेंसियाँ इस पर निगरानी रखेंगी।

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