शोभना शर्मा। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित हाईकोर्ट एक बार फिर बम धमकी के कारण सुरक्षा अलर्ट पर आ गया। सोमवार को हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। यह धमकी पहले मिले खतरनाक अलर्ट के केवल दो दिन बाद मिली है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि बार-बार मिल रही धमकियों के पीछे कोई संगठित डिजिटल नेटवर्क हो सकता है।
न्यायिक कार्य प्रभावित, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
धमकी मिलते ही सुरक्षा व्यवस्था तुरंत कड़ी कर दी गई। अदालत परिसर को खाली कराया गया और बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और पुलिस टीमों ने तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान प्रवेश और निकास द्वार पूरी तरह सील रहे। इस प्रक्रिया के कारण न्यायिक कार्यों पर भारी असर पड़ा और कई वादियों एवं अधिवक्ताओं को कोर्ट कैंपस से बाहर इंतजार करना पड़ा। अदालत की कार्यवाही बाधित होने से सुनवाई प्रभावित हुई, जिससे अधिवक्ताओं में असंतोष देखा गया।
अधिवक्ताओं ने प्रशासन और सुरक्षा तंत्र पर उठाए सवाल
लगातार मिल रही धमकियों पर अधिवक्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि न्यायपालिका जैसे अत्यधिक संवेदनशील संस्थान को बार-बार धमकियां मिलना सुरक्षित माहौल पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। कई वकीलों ने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो न्यायालय का काम पूरी तरह से ठप हो जाएगा और जनता के लिए न्याय तक पहुंच प्रभावित होगी। अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन से ठोस कार्रवाई और स्थायी समाधान की मांग की।
बीते शुक्रवार को भी मिली थी धमकी
सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर बनाते हुए शुक्रवार को भी राजस्थान हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। जांच में सामने आया था कि धमकी रजिस्ट्रार सीपीसी के कार्यालय की मेल आईडी पर भेजे गए ईमेल के माध्यम से दी गई थी। लंबी तलाशी के बाद धमकी को फर्जी पाया गया। हालांकि, दो दिनों के भीतर दोबारा धमकी मिलना सुरक्षा तंत्र की गंभीर परीक्षा लेकर आया है।
जांच जारी, साइबर टीम सक्रिय
नई धमकी की जांच के लिए पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें काम कर रही हैं। ईमेल और संचार माध्यमों की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों धमकियां एक ही स्रोत से तो नहीं भेजी गई हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


