शोभना शर्मा। राजस्थान में पंचायत राज भर्ती 2013 से जुड़ा मामला एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट में चर्चा में है। आज 8 दिसंबर को इस केस पर सुनवाई होगी, जिसके लिए हाईकोर्ट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन मेजर जनरल आलोक राज को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। यह मामला पिछले 12 वर्षों से लंबित है और भर्ती प्रक्रिया विवादों के कारण पूर्ण नहीं हो पाई है।
19,275 पदों पर निकली थी भर्ती, फिर विवाद में फंस गई प्रक्रिया
पंचायती राज विभाग ने वर्ष 2013 में एलडीसी के 19,275 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। प्रारंभिक चरण में लगभग 7,755 उम्मीदवारों को नियुक्तियां भी प्रदान कर दी गई थीं। लेकिन नियुक्तियों के बाद बोनस अंकों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया, जिसके चलते पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। इसके बाद हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं और मामला न्यायालय में लंबित है।
पहले 6 दिसंबर को पेशी के आदेश, अब 8 दिसंबर को व्यक्तिगत हाजिरी जरूरी
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने चेयरमैन आलोक राज को आज दोपहर 2 बजे कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। इससे पहले अदालत ने 6 दिसंबर को भी हाजिर होने के निर्देश दिए थे, लेकिन बोर्ड की ओर से वकील ने प्रार्थना पत्र देकर समय मांगा था। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए 8 दिसंबर को हर स्थिति में पेशी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में सुलझाया बोनस अंक विवाद
भर्ती में बोनस अंकों को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 29 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने विवाद का निपटारा कर दिया और राज्य सरकार को भर्ती आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद वर्ष 2017 में राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में गठित रिकॉर्ड के आधार पर शेष 10,029 पदों पर नियुक्तियां देने की सहमति भी दी। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
सरकार ने केवल 392 पदों पर नियुक्तियां देने की सहमति जताई
कई वर्षों तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं होने पर अभ्यर्थी फिर हाईकोर्ट पहुंचे। इस दौरान सरकार ने अदालत में बताया कि नई भर्तियां निकल चुकी हैं, कैडर का पुनर्गठन किया जा चुका है और करीब 4,000 पद प्रमोशन और डायरेक्ट भर्ती से भर दिए गए हैं। इसलिए सरकार शेष 6,029 पदों पर नियुक्तियां प्रदान करने की स्थिति में नहीं है और केवल 392 पदों पर नियुक्ति देना संभव है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस स्थिति को स्वीकार भी किया, लेकिन भर्ती अब भी अपने समाधान की प्रतीक्षा में अटकी हुई है।
आज की सुनवाई से अभ्यर्थियों को उम्मीद
लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों की निगाहें आज की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत द्वारा चेयरमैन की व्यक्तिगत पेशी को आवश्यक माना जाना यह संकेत देता है कि न्यायालय इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहता है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि आज की सुनवाई भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।


