शोभना शर्मा। जयपुर के पॉश इलाके मालवीय नगर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब G+4 यानी पांच मंजिला निर्माणाधीन होटल अचानक एक तरफ झुक गया। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में खुदाई के दौरान संरचना कमजोर हो गई और दीवारों में कई दरारें पड़ गईं। कुछ ही मिनटों में इमारत visibly टेढ़ी हो गई, जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
क्रेन से अस्थायी सपोर्ट, फिर ध्वस्त करने का फैसला
स्थिति का आकलन करने के बाद जेडीए टीम ने दो क्रेन की मदद से बिल्डिंग को अस्थायी सहारा दिया ताकि वह सड़क और पास की इमारतों पर न गिरे। लेकिन विशेषज्ञों की रिपोर्ट में संरचना को पूरी तरह असुरक्षित पाया गया। जेडीए ने जोखिम को देखते हुए रविवार को होटल को गिराने का आदेश जारी किया।
ढहाने की प्रक्रिया से पहले जेसीबी मशीनों से दीवारों में ड्रिलिंग कर स्ट्रक्चर को कमजोर किया गया और फिर पूरी इमारत को नियंत्रित तरीके से जमीनदोज किया गया।
कार्रवाई देखने के लिए जुट गई भारी भीड़
ध्वस्तीकरण के दौरान आसपास की सड़क पर मलबा गिरने से आवाजाही बाधित हुई। जेडीए की टीम लगातार जेसीबी से मलबा साफ करती रही। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और कई लोग पूरे ऑपरेशन को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करते नजर आए।
स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि शनिवार दोपहर बिल्डिंग झुकने के बाद ही कई परिवार एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकल गए थे।
मालिक का विरोध, आरोप— राजनीतिक प्रभाव में फैसला
कार्रवाई के दौरान होटल मालिक और जेडीए अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। मालिक ने दावा किया कि इमारत पूरी तरह वैध थी।
उनका कहना था—
“हमने नगर निगम से नक्शा पास करवाया था और 1.25 लाख रुपये भी जमा कराए हैं। न लीगल टीम आई, न आर्किटेक्ट से बात की गई, सीधे बुलडोजर चला दिया गया। यह कार्रवाई राजनीतिक प्रभाव में की गई है।”
मालिक ने संकेत दिया कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे।
JDA ने नियमों के उल्लंघन को बताया कारण
दूसरी ओर जेडीए अधिकारियों ने मालिक के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
जोन-1 के तहसीलदार शिवांग शर्मा के अनुसार 90 गज के प्लॉट पर कॉमर्शियल गतिविधि की अनुमति नहीं है क्योंकि यह रेजिडेंशियल जोन है।
डिप्टी इन्फोर्समेंट ऑफिसर इस्माइल खान ने कहा कि न तो होटल निर्माण की सहमति ली गई और न ही प्राधिकरण के पास कोई आवेदन दर्ज हुआ। उन्होंने इसे स्पष्ट नियम उल्लंघन बताया।
सात महीने में खड़ी हुई थी इमारत, खतरा बड़ा था
स्थानीय निवासियों के अनुसार होटल का निर्माण मात्र सात महीनों में तेज गति से किया गया था। बाहरी काम लगभग पूरा हो चुका था और अंदर इंटीरियर चल रहा था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बेसमेंट खुदाई की गलत पद्धति और तेज निर्माण दोनों मिलकर संरचना की कमजोरी का कारण बने।
इमारत गिरने की आशंका टली
जेडीए के अनुसार यदि कार्रवाई में देरी की जाती तो इमारत किसी भी समय गिर सकती थी, जिससे बड़े हादसे की संभावना थी। तेजी से निर्णय ने स्थानीय आबादी को संभावित खतरे से बचाया।


